भगवान परशुराम के मंदिर, जहां झलकता है शस्त्र विद्या ज्ञानी परशुराम का अस्तित्व

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Parshuram Mahadev temple – भगवान परशुराम को विष्णु जी का छठा अवतार माना जाता है| परशुराम त्रेता युग यानी रामायण काल के ब्राह्मण थे| वह शस्त्र विद्या के महान ज्ञाता थे| अपने जीवन काल में उन्होंने भीष्म, द्रोण व कर्ण को शस्त्रविद्या सिखाई थी| भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ था इसलिए अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती मनाई जाती है| तो चलिए आज हम आपको परशुराम जी के फेमस मंदिरों के बारे में बताते हैं|

parshuram mahadev temple

Parshuram Mahadev temple | भगवान परशुराम के फेमस मंदिर

परशुराम महादेव मंदिर, राजस्थान

  • राजस्थान राज्य के दो जिलों- राजसमन्द व पाली जिले की सीमा पर स्तिथ है परशुराम महादेव मंदिर|
  • कहा जाता है कि इस जगह पर परशुराम जी ने तपस्या की थी और अपने शिष्यो को शिक्षा भी दी थी|
  • यह हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक गिना जाता है|
  • इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अरावली पहाड़ियों की गुफा में स्थित इस मंदिर का निर्माण खुद भगवान परशुराम ने अपने फरसे से किया था|

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पिथे परशुराम, चिपलून (परशुराम मंदिर और गांव)

  • चिपलुन महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी जिले में स्थित एक पर्यटन स्थल है|
  • वही पास में पिथे परशुराम गांव चिपलुन के नज़दीक स्थित है|
  • इस जगह से जुड़ी कहानियां बताती हैं कि एक बार परशुराम जी ने अपने आप को गुरु के सामने सच्‍चा संन्‍यासी सिद्ध करने के लिए अपनी पूरी भूमि दान कर दी थी, जिसके बाद वह पिथे परशुराम आ गए|
  • वही एक बार गुस्‍से में उन्‍होंने अपना फरसा (एक प्रकार का हथियार) समुद्र में फेंक दिया था, जिसके बाद परशुराम के गुस्‍से के कारण समुद्र ने अपने को पीछे खींच लिया था|
  • तबसे यह जगह परशुराम जी ने अपने निवास के लिए चुनी|
  • वर्तमान में यह जगह पयर्टक स्‍थल के रूप में बदल गयी है|
  • यहाँ एक 700 साल पुराना मंदिर है जो कि भव्‍य तो नहीं है लेकिन लोगों की आज भी यहाँ भीड़ और श्रद्धा देखने को मिलती है|

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टांगीनाथ धाम, झारखण्ड

  • झारखंड राज्य मे गुमला शहर से करीब 75 किमी की दूरी पर स्तिथ टांगीनाथ धाम भगवान परशुराम का तपो स्थली के रूप में जाना जाता है|
  • यह जगह यह जगह रांची से करीब 150 किमी की दूरी पर है|
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने यहां शिव की उपासना की थी और यहीं उन्होंने अपने फरसे को ज़मीन में गाड़ दिया था|
  • झारखंड में फरसा को टांगी कहा जाता है, इसलिए इस स्थान का नाम टांगीनाथ धाम पड़ा|
  • यहाँ पर गड़े लोहे के फरसे कि विशेषता यह है कि हज़ारों सालों से खुले मे रहने के बावजूद इस फरसे पर ज़ंग नहीं लगी है|
  • इसके अलावा कोई भी इस बात को नहीं जानता कि ये फरसा कितना नीचे तक गड़ा हुआ है|

श्री रेणुका जी, हिमाचल प्रदेश

  • हिमाचल के सिरमौर में स्थित रेणुका जी भगवान परशुराम की जन्मभूमि मानी जाती है|
  • रेणुकाजी झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। इसी झील के किनारे मां रेणुकाजी व भगवान परशुरामजी का भव्य मंदिर हैं।
  • यह हिंदुओ का प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है|
  • यहाँ साल में एक बार पांच दिनों तक चलने वाला मेला लगता है,जिसमें दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं|

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परशुराम मंदिर, त्रंबकेश्वर

  • इस मंदिर में भगवान परशुराम की बाल स्वरूप की पूजा की जाती है|
  • यह भारत का पहला परशुराम मंदिर है|
  • इस मंदिर का निर्माण 1850 के आस-पास हुआ था|
  • मंदिर से जुड़ी कहानियों के अनुसार परशुराम जी ने नील पर्वत पर तपस्या की थी, जहाँ आज अन्नपूर्णा माता का मंदिर स्थित है|

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