Pride Parade in India – प्राइड परेड जून में क्यों मनाते हैं और क्या है इसका इतिहास?

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Pride Parade History in India in Hindi – Pride Parade in India – Pride parade ka itihaas – kyu manate hai pride parade –  अपने आप में जून महीना बड़ा महत्व रखता है और ये महीना समाज सुधारक महीने के रूप में जाना जाता है। पूरी दुनिया खासतौर से लैटिन-अमेरिकन देशों में जून को ‘प्राइड मंथ’ के रूप में मनाया जाता है। कुछ विशेष समुदायों के द्वारा जून महीने को प्राइड परेड मंथ (Pride Parade Month) (Pride Month) कहा जाता है। यह हर साल दुनिया भर में एलजीबीटीक्यू (LGBTQ)  समुदाय और इसे समर्थन देने वाले लोगों के द्वारा बेहद उत्साह से मनाया जाता है। प्रदर्शन के दौरान ये लोग हाथो में एक झंडा लेकर चलते हैं जिसे इंद्रधनुष कहते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं प्राइड परेड जून में क्यों मनाते हैं और क्या है भारत में इसका इतिहास?pride parade history in india in hindi

Pride Parade History in India in Hindi – Pride parade in india

 क्यों मनाया जाता है प्राइड मंथ? –  Why is Pride Month celebrated?

28 जून 1969 को अमेरिका के मैनहट्टन के स्टोन वॉल में अवस्थित एलजीबीटीक्यू ( LGBTQ) समुदाय के लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, यह छापेमारी गे (Gay) समुदाय के लोगों के द्वारा लगातार किए जा रहे प्रदर्शनों और धरनों के विरोध में की गई थी। इस छापेमारी के दौरान ही पुलिस और वहां मौजूद लोगों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इसके बाद पुलिस ने जब लोगों को गिरफ्तार करना शुरू किया तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। अब इस समुदाय के लोगों ने विद्रोह करना शुरू कर दिया और यह संघर्ष लगातार तीन दिनों तक चला। इस लड़ाई से न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में समलैंगिक आज़ादी के आंदोलन की शुरूआत हुई, बल्कि बहुत से राष्ट्रों में आंदोलन शुरू हो गया। इसके बाद इस समुदाय के लोगों ने अपने अधिकारों की मांग और अपनी आइडेंटिटी पर गर्व करने के लिए प्रत्येक साल जून महीने में शांति पूर्वक प्राइड परेड करने का फैसला लिया।

प्राइड मंथ पर निकलती है लाखों लोगों की परेड – Pride month par nikalti hai parade 

इस मंथ को एलजीबीटीक्यू  समुदाय के खिलाफ हो रही यातनाओं के विरोध में भी देखा जाता है। इसके साथ ही, इस महीने का इस्तेमाल राजनैतिक तौर पर एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के बारे में सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए भी होता है। पूरे महीने ये लोग जगह-जगह परेड निकालते हैं। इस समुदाय के प्रति समर्थन ज़ाहिर करने के लिए भी कई संस्थाएं इनकी परेड में शामिल होती हैं।

Pride Parade History in India in Hindi

अमेरिका में प्राइड मंथ को कब मिली मान्यता – America me pride month ko kab mili manyata

बिल क्लिंटन साल 2000 ऑफिशियल तौर पर प्राइड मंथ (Pride Month) को मान्यता देने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। साल 2009 से 2016 तक अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा रहें, तो इस दौरान इन्होंने जून माह को एलजीबीटीक्यू के लोगों के लिए प्राइड मंथ की घोषणा की। मई 2019 में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ट्वीट के साथ प्राइड मंथ को मान्यता दी। इसमें घोषणा की गई थी कि उनके प्रशासन ने एलजीबीटीक्यू को अपराध की श्रेणी से हटाने के लिए एक वैश्विक अभियान शुरू किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी आधिकारिक रूप से ‘प्राइड मंथ’ की घोषणा की है। न्यूयॉर्क प्राइड परेड होने वाली सबसे बड़ी और सबसे प्रसिद्ध परेड में से एक है।

प्राइड परेड का झंडा कैसा होता है

प्राइड परेड का झंडा साल 1978 में अमेरिका के शहर सैन फ्रांसिस्को के कलाकार गिल्बर्ट बेकर (Gilbert Baker) द्वारा डिज़ाइन किया गया था। बेकर द्वारा बनाये गए झंडे में 8 रंग थे – गुलाबी, लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और वायलेट, लेकिन अगले ही साल से इस झंडे में छह-रंग कर दिए गए जिसमें लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला और वायलेट रंग हैं। ये लोग इसे इंद्रधनुष (rainbow flag) मानते हुए परेड में शामिल करते हैं। महीने भर चलने वाली इस परेड में कार्यशालाएं, संगीत कार्यक्रम समेत कई अन्य कार्यक्रम शामिल हैं, जो हर जगह लोगों को आकर्षित करते हैं। इस समुदाय के लोग अपने उत्सव में शामिल होने के लिए वेशभूषा, श्रृंगार के साथ तैयार होते हैं।

Pride parade in india

किसने दिया प्राइड परेड नाम?Who gave the name Pride Parade?

इस आंदोलन को ‘प्राइड’ कहने का सुझाव साल 1970 में समलैंगिक अधिकारों के कार्यकर्ता एल क्रेग शूनमेकर ने दिया था। इसका खुलासा उन्होंने दिए एक इंटरव्यू में किया इन्होंने कहा कि इससे जुड़े हुए लोग अंदर ही अंदर संघर्ष कर रहे थे और उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि खुद को समलैंगिक साबित कर अपने पर गर्व कैसे महसूस करें।

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भारत में कब शुरू हुई प्राइड परेड और इसका इतिहास? Bharat me kab shuru hui pride parade – pride parade ka itihaas

जानकारों की माने तो भारत में पहली प्राइड परेड 02 जुलाई, 1999 को कोलकाता में आयोजित की गई थी। इसे तब कोलकाता रेनबो प्राइड वाक (Kolkata Rainbow Pride Walk) नाम दिया गया था। सिटी ऑफ़ जॉय के नाम से मशहूर कोलकाता में हुई इस परेड में सिर्फ़ 15 लोग शामिल हुए थे जिसमें एक भी महिला नहीं थी। इसके बाद आने वाले सालों में देश के कई राज्यों/शहरों में इसका आयोजन किया जाता है।

साल 2008 में दिल्ली और मुंबई में पहली बार एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय लोगों ने प्राइड परेड (Pride Parade) का आयोजन किया था। दिल्ली में इस समुदाय के द्वारा हर साल नवंबर के आखिरी संडे को प्राइड परेड का आयोजन किया जाता है।

Pride parade in india

भारत में एलजीबीटीक्यू के कानूनी अधिकार क्या हैं? – What are the legal rights of LGBTQ in India?

भारत में आर्टिकल 377 के तहत समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में था लेकिन साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता पर लगी धारा 377 को वैध घोषित कर दिया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भारत में एलजीबीटीक्यू को संबंध बनाने का क़ानूनी अधिकार दे दिया गया। इस ख़ुशी के मौके पर इसे सेलिब्रेट करने के लिए एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों ने पूरे देश में एक स्वतंत्र नागरिक की हैसियत से मार्च किया।

हालांकि अभी भी भारत में एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को शादी करने और बच्चे गोद लेने का अधिकार नहीं है जबकि ऑस्ट्रेलिया, माल्टा, जर्मनी, फिनलैंड, कोलंबिया, आयरलैंड, अमेरिका, ग्रीनलैंड, स्कॉटलैंड समेत 26 देशों में एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को शादी करने और बच्चे गोद लेने का अधिकार है।

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