Rigveda kya hai – जानिए वेद का प्रथम भाग ‘ऋग्वेद’ क्या है

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Rigveda kya hairigved kya hai hindi mai rigved mein kya hairigved ka arth kya hai – हिन्दू धर्म का सबसे प्राचीन तथा पवित्र ग्रंथ वेद है। वेद ऐसे ग्रंथ हैं जो ब्रह्माण्ड के ज्ञान विज्ञान की विद्या प्रदान करते हैं। वेद को सरलता से पढ़ने तथा स्मरण रखने के लिए वेद को चार विभागों में विभाजित किया गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। इनमें से ऋग्वेद एक ऐसा वेद है जिसमें से अन्य तीन वेदों का निर्माण किया गया है। आज हम आपको अपने लेख के माध्यम से प्रथम वेद ऋग्वेद की जानकारी प्रदान करने वाले हैं। यह ऋग्वेद दुनिया का प्रथम ग्रंथ व धर्मग्रंथ है।rigveda kya hai

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ऋग्वेद पद्यात्मक विधा से संबंधित वेद है। ऋग्वेद की रचना संभवतः सप्त सैधव प्रदेश में की गई थी। ऋग्वेद की रचना का श्रेय किसी एक ऋषि को नहीं जाता है और ना ही ऋग्वेद की रचना की कोई निश्चित अवधि तय है। वेदों के वेद ऋग्वेद को विभिन्न कालों में विभिन्न ऋषियों द्वारा रचा तथा संकलित किया गया है।

ऋग्वेद का अर्थ – rigved ka arth – rigved ka arth kya hai

ऋग्वेद वेदों में सबसे पहला वेद है। ऋक का अभिप्राय है स्थिति तथा ज्ञान जिसमें आपको संपूर्ण ज्ञान मिलता है। इसके अन्तर्गत आपको वायु चिकित्सा, हवन चिकित्सा, जल चिकित्सा, सौर चिकित्सा आदि की जानकारी मिलती है। भौगोलिक ज्ञान के साथ – साथ इसमें देवी देवताओं की स्तुति का भी ज्ञान मिलता है। ऋग्वेद में च्यवन ऋषि को पुनः युवा करने की कथा का भी वर्णन है।

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ऋग्वेद का परिचय : – rigved ka sankalan kab hua – rigved ka saar kya hai – rigved stuti in hindi pdf

ऋग्वेद में 10 मंडल हैं जिसके अंदर 1028 सूक्त हैं। इन सूक्त में 11 हज़ार तक मंत्र हैं। ऋग्वेद में अनेक ऋषियों द्वारा लिखित विभिन्न छंद में लगभग 400 ऋचाएं हैं। ऋग्वेद के अंदर देवताओं की स्तुतियां मिलती हैं जो अग्नि, वायु, वरुण, इन्द्र, प्रजापति, विश्वदेव, मरूत, सूर्य, ऊषा, पुषा, सविता आदि देवी देवताओं को समर्पित है।

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प्रथम तथा अंतिम मंडल एक समान रूप से बढ़े हैं जिनमें सूक्तों की संख्या 191 भी समान है। इसके अतिरिक्त दूसरे मंडल से सातवें मंडल तक का भाग ऋग्वेद का श्रेष्ठ भाग है। आठवें मंडल के सूक्त प्रथम के लगभग समान है। ऋग्वेद के नौवे मंडल का सोम मंडल संबंधी आठों सूक्तों का संग्रह है। इसके दसवें मंडल में प्रथम मंडल की ही सूक्त की संख्या को बनाकर रखा गया है। दसवें मंडल में औषधियों दवाओं का वर्णन किया है। इसमें औषधियों की संख्या 125 के लगभग बताई गई है।

ऋग्वेद के प्रथम मंडल के रचयिता अनेक ऋषि हैं। इसके अतिरिक्त दूसरे मंडल के रचनाकार गृत्समय को कहा जाता है। तृतीय मंडल के विश्वासमित्र तथा चतुर्थ मंडल के वामदेव कहे जाते हैं। पंचम मंडल के अत्रि, षष्ठ मंडल के भारद्वाज, सप्तम मंडल के वसिष्ठ, अष्टम के कण्व व अंगिरा। नवम तथा दशम मंडल के भी रचनाकार अनेक ऋषि हुए।

Rigveda kya hai

आपको बता दें कि ऋग्वेद के भी दो विभाग होते हैं –

  1. अष्टक क्रम
  2. मंडल क्रम।

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ऋग्वेद के उपनिषद निम्नलिखित हैं – rig veda upanishads pdf – rig veda upanishads

ऋग्वेद के अन्तर्गत 10 उपनिषद् बनाए गए हैं

1.ऐतरेय,

2.आत्मबोध,

3.कौषीतकी,

4.निर्वाण,

5.मूदल,

6.नादबिंदु,

7.अक्षमाया,

8.त्रिपुरा,

9.ब्रह्मरुका तथा

10. सौभाग्यलक्ष्मी।

 वेदों में ब्राह्मण ग्रंथों की संख्या 13 है जिसमें ऋग्वेद के कुल 2 ब्राह्मण ग्रन्थ हैं  

  • ऐतरेयब्राह्मण
  • कौषीतकि ब्राह्मण।

Rigveda kya hai

 ऋग्वेद की पांच प्रमुख शाखाएं हैं जो निम्नलिखित हैं –

  • शाकल्प
  • वास्कल
  • अश्वलायन
  • शाखांयान
  • मंडूकायान
  • इसके अतिरिक्त इन शाखाओं की 21 शाखाएं हैं।

ऋग्वेद का उपवेद – आयुर्वेद – आयुर्वेद के कर्ता धन्वंतरि हैं।

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