Saphala Ekadashi Puja Vidhi in Hindi – कब है सफला एकादशी? जानें महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

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Saphala Ekadashi Puja Vidhi in Hindi – सफला एकादशी नए वर्ष 2021 की पहली एकादशी है। इस बार सफला एकादशी 9 जनवरी 2021 को मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल में चौबीस एकादशी होती हैं। तो चलिए आपको बताते हैं सफला एकादशी का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त।saphala ekadashi puja vidhi

Saphala Ekadashi Puja Vidhi in Hindi – सफला एकादशी पूजन विधि – Saphala ekadashi 2021 puja vidhi shubh muhurat

कब है सफला एकादशी? Saphala Ekadashi kab hai 

  • 9 जनवरी 2021 को सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सफला एकादशी मनाएंगी।  पौष मास के कृष्ण पक्ष में सफला एकादशी मनाई जाती है।
  • इस दिन नारायण भगवान की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। इस एकादशी को कल्याण करने वाली माना जाता है। ये एकादशी समस्त व्रतों में सबसे श्रेष्ठ है।

सफला एकादशी महत्व-  Saphala ekadashi vrat mahatva

  • सफला एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से किया जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा – पाठ करने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होते हैं और इच्छाएं भी पूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • मनुष्य भगवान विष्णु के धाम बैकुंठ को प्राप्त करता है। इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती है। यह एकादशी कल्याण करने वाली है।

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Saphala Ekadashi Puja Vidhi in Hindi

सफला एकादशी व्रत विधि – Saphala Ekadashi Vrat Vidhi

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • घट स्थापना करके भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • फूल, धूप और पंचामृत आदि चीज़े भगवान विष्णु पर चढ़ाएं और व्रत की कथा का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन या निराहार रहकर पूरा दिन व्रत करें।
  • रात में प्रति पहर भगवान विष्णु और शिव भगवान की पूजा करें।
  • पीपल, तुलसी के समीप घी का दीपक जलाएं|
  • रातभर कीर्तन, भजन करें।
  • अगले दिन प्रात: व्रत का पारण समापन करें।
  • पारण के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार ब्राह्मण और ज़रूरतमंदों को दान करें और भगवान विष्णु से क्षमायाचना कर अपना व्रत खोलें|

सफला एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त – Saphala ekadashi shubh muhurat

  • सफला एकादशी तिथि – 09 जनवरी 2021
  • पारण का समय – सुबह 07.15 से सुबह 09. 21 तक (10 जनवरी 2021)
  • एकादशी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 08, 2021 को रात 9:40 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – जनवरी 09, 2021 को शाम 7:17 बजे तक

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Saphala Ekadashi Puja Vidhi in Hindi

सफला एकादशी कथा – Saphala ekadashi katha 

  • पौराणिक कथा के अनुसार चम्पावती नगर का राजा महिष्मत हुआ करता था और उसके पांच पुत्र थे। महिष्मत का बड़ा बेटा लुम्भक हमेशा बुरे कार्य करता था। एक बार उसकी इन्हीं हरकतों की वजह से महिष्मत राजा ने उसे अपने राज्य से बाहर निकाल दिया। लुम्भक एक वन में चला गया और वहां जाकर चोरी करने लगा। एक दिन जब वह रात में चोरी करने के लिए निकला तो कुछ सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया, लेकिन जब उसने बताया कि वो राजा महिष्मत का पुत्र है तो सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया। फिर वह दोबारा वन में लौट गया और वृक्षों के फल खाकर अपना जीवन व्यतीत करने लगा। वह एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे रहता था। एक बार अंजाने में ही उसने पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रख लिया। उसने पौष मास में कृष्णपक्ष की दशमी के दिन वृक्षों (पेड़ों) के फल खाए और पूरी रात जाड़े का कष्ट भोगा। सूर्योदय होने पर उसको होश आ गया।
  • एकादशी के दिन भी लुम्भक पूरा समय बेहोश पड़ा रहा। दोपहर होने पर उसे होश आया। तब उठकर लुम्भक वन में गया और बहुत से फल लेकर विश्राम स्थल पर लौटा, लेकिन तब तक सूर्य अस्त हो चुका था। तब उसने पीपल के पेड़ की जड़ में बहुत से फल रखें और निवेदन करते हुए कहा इन फलों से लक्ष्मी पति विष्णु भगवान संतुष्ट हों, ऐसा कहकर लुम्भक रातभर जागता रहा। इस प्रकार उसने अनजाने में सफला एकादशी व्रत का पालन कर लिया। उसी समय एक आकाशवाणी हुई कि राजकुमार लुम्भक! सफला एकादशी व्रत के प्रभाव से तुम राज्य और एक पुत्र प्राप्त करोगे। आकाशवाणी के बाद लुम्भक का स्वरूप दिव्य हो गया। तबसे उसकी उत्तम बुद्धि विष्णु भगवान के भजन में लग गई। उसने 15 सालों तक सफलतापूर्वक अपने राज्य का संचालन किया। उसको मनोज्ञ नामक पुत्र प्राप्त हुआ। जब वह बड़ा हुआ तो लुम्भक ने राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया और वह खुद भगवान नारायण की भक्ति में लग गया। अंत में सफला एकादशी के व्रत के प्रभाव से उसने विष्णु लोक को प्राप्त किया।

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