Satyanarayan Katha pdf: यहां पढ़ें श्री सत्यनारायण की व्रत कथा

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Satyanarayan katha pdf in hindi – Satyanarayan ki katha in hindi – हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए श्री सत्यनारायण की कथा एक ऐसा माध्यम है जिसके ज़रिए वो अपने जीवन के समस्त कष्टों का निवारण कर सकते हैं। सुख – समृद्धि प्राप्त कर मोक्ष की प्राप्ति का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं परंतु इसके लिए आवश्यक है कि आपको ज्ञात हो कि सत्यनारायण की कथा है क्या? सत्यनारायण की कथा का अर्थ है कि इस सर्वजगत में एकमात्र नारायण ही सत्य है। उनके प्रति प्रेम, श्रृद्धा, भक्ति सत्य पर आधारित होनी चाहिए। तो आईये यहां पढ़िए श्री सत्यनारायण की कथा।satyanarayan katha pdf

Satyanarayan katha pdf in hindi – Satyanarayan ki katha in hindi – सत्यनारायण व्रत कथा

एक बार नारायण देव भ्रमण कर रहे थे। भ्रमण करते हुए उनकी नज़र मृत्युलोक पर पड़ी जहां समस्त प्राणी अपने कर्मों के अनुसार अनेक दुखों से परेशान हो रहे थे। यह देखकर उनका हृदय द्रवित हो उठा तथा वे अपने परम आराध्य श्री हरि के परम धाम क्षीरसागर में स्तुति करते हुए पहुंच गए। स्तुति करते हुए नारद जी बोले, “प्रभु, यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं तो मृत्युलोक के प्राणियों के कष्टों को हरने वाला कोई मार्ग दिखलाने की कृपा करें।” भगवान श्रीहरि बोले, हे वत्स! तुम्हरा प्रश्न विश्वकल्याण की भावना से ओतप्रोत है। आज मैं तुम्हारे इस प्रश्न का हल देते हुए यह उपाय बताता हूं। एक ऐसा व्रत, जो महान पुण्यदायक है, समस्त कष्टों को दूर करने वाला तथा मोह माया के बन्धन को काटकर मोक्ष की प्राप्ति का फल देता है। सत्यनारायण का व्रत ही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। यह व्रत स्वर्ग में भी दुर्लभ है।

Satyanarayan vrat katha 

तब काशीपुर नगर में एक निर्धन ब्राह्मण को भिक्षा मांगते देख, श्री हरि वहां एक बूढ़े ब्राह्मण का रुप लेकर जाते हैं। उस निर्धन ब्राह्मण के पास जाकर बतलाते हैं कि, हे प्रिय श्री सत्यनारायण की कथा सभी दुखों को हरने वाली है। श्री सत्यनारायण कथा में व्रत अथवा उपवास का भी विशेष महत्व है। व्रत के दौरान श्री हरि का ध्यान करना चाहिए। अंदर तथा बाहर शुद्धता बनाकर रखनी चाहिए तथा अंततः श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण किया जाना चाहिए। श्री सत्यनारायण कथा में प्रत्येक मानव का समान अधिकार है। इस कथा का लाभ भी समान रूप से प्राप्त होता है। निर्धन, धनी, व्यवसायी, स्त्री, पुरुष, साधु वैश्य, जिसकी पत्नी लीलावती, पुत्री कलावती, तुंगध्वज नामक राजा तथा गोपगणों आदि का कथा में समावेश किया गया है।

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Satyanarayan katha pdf in hindi

सत्यनारायण कथा का श्रवण करने से हमें यह ज्ञात होता है कि जिस भी प्राणी ने सत्य के मार्ग को श्रृद्धा विश्वास के साथ अपनाया उसके सभी कार्य सफल हुए। जिस प्रकार गरीब ब्राह्मण, लकड़हारा, उल्कामुख तथा गोपगनों ने सुना कि यह व्रत सुख समृद्धि शांति देने वाला है तो उसके बाद से ही उन्होंने सत्य व्रत धारण करने का निश्चय किया जिसके बाद वो धरती पर सुख भोगकर परम धाम को चले गए। इसके अलावा जब साधू वैश्य ने श्री सत्यनारायण कथा का गुणगान राजा उल्कामुख से सुना तो उसने भी कथा कराने का निर्णय लिया लेकिन उसकी श्रृद्धा में कमी थी। भगवान श्रीहरि की कृपा से उसके घर एक सुंदर कन्या ने जन्म लिया, उस समय उसकी पत्नी ने सत्यनारायण कथा कराने का स्मरण कराया परंतु उसने कहा कि अब कन्या के विवाह के समय कथा करा लेंगे। कन्या का विवाह भी संपन्न हुआ किन्तु उस साधु वैश्य ने श्री सत्यनारायण कथा का पाठ नहीं कराया। एक दिन वह अपने दामाद के साथ व्यापार पर गया जहां उसे चोरी के आरोप में राजा चन्द्रकेतु के यहां दामाद सहित बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया गया। इन दोनों की अनुपस्थिति में घर में भी चोरी हो गई जिस कारण लीलावती तथा कलावती भीक्षा मांगने के लिए मजबूर हो गई। एक दिन कलावती ने किसी के घर श्री सत्यनारायण कथा को होते देखा तथा अपनी मां को बताया जिसको सुनते ही कलावती की मां लीलावती को सबकुछ याद आ गया। उसने पूर्ण श्रृद्धा भक्ति से श्री सत्यनारायण कथा का पाठ किया तथा पति एवं दामाद के घर सुरक्षित वापस लौट आने की प्रार्थना की। इससे श्री हरि प्रसन्न हुए तथा राजा चंद्रसेन को स्वप्न में दोनों को छोड़ने का आदेश दिया जिसके बाद राजा ने उन दोनों को बहुत सारा धन धान्य देकर विदा किया। घर पहुंचकर साधु वैश्य प्रत्येक पूर्णिमा तथा सक्रांति को कथा करता रहा। अंततः मोक्ष का भोग प्राप्त किया।

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उसी प्रकार वन में भ्रमण करते हुए राजा तुंगध्वज ने  वन में गोपगण को जब श्री सत्यनारायण की कथा करते देखा तो अहंकार के मद में वह ना तो कथा में बैठा तथा न ही भोग ग्रहण किया। परिमाण यह हुआ कि कुछ समय के बाद ही राजा का राज्य, परिवार सबकुछ नष्ट हो गए। जब उसे यह ज्ञात हुआ कि उसकी विपत्ति का कारण श्री सत्यनारायण कथा का अनादर है तो राजा तुरंत वन में गोपगण समूह के पास गया तथा सत्यनारायण कथा का श्रवण पाठन किया तथा प्रसाद ग्रहण किया। कुछ ही समय में राजा का राज्य पुनः वापस मिल गया तथा परिवार भी सुरक्षित वापस आ गया। इसके बाद राजा ने अपना सर्वस्व श्री सत्यनारायण के प्रति समर्पित कर दिया।

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सत्यनारायण की कथा हमें यही बताती है कि इस संसार में मोह माया के बन्धन से मुक्ति परम आवश्यक है। हमें सत्य के रूप का सम्मान करना चाहिए तथा भक्ति स्वरूप श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का प्रयत्न करना है। भक्ति मानव का धर्म है। यही श्री सत्यनारायण कथा का सार है।

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