सृष्टि के निर्माण में क्यों धरा शिव ने अर्धनारीश्वर अवतार

Please follow and like us:

Shiv Ardhanarishvara kahani भगवान शिव के कई स्वरुप हैं, मगर उनका अर्धनारीश्वर अवतार सबसे खास माना जाता है| इस स्वरूप में संसार के विकास की कहानी छुपी हुई है| शिव पुराण, नारद पुराण सहित अन्य कई पुराणों के अनुसार अगर शिव इस स्वरूप को धारण नहीं करते तो सृष्टि आज भी वीरान रह जाती| तो चलिए जानते हैं भोले भंडारी के अर्द्घनारीश्वर अवतार की कहानी और महत्व|shiv ardhanarishvara kahani

Shiv Ardhanarishvara Kahani in hindi – अर्धनारीश्वर रुप का महत्व और कहानी

अर्धनारीश्वर का क्या अर्थ होता है?

  • अर्धनारीश्वर का अर्थ है आधा हिस्सा नारी का और आधा नर का|
  • इस स्वरुप को अर्धनारी, अर्धनारीशा, अर्धनारीनेश्वरा के नाम से भी जाना जाता है , हालांकि भारत में बहुत कम मंदिर शिव के अर्धनारीश्वर स्वरुप को समर्पित हैं|

शिव के अर्धनारीश्वर स्वरुप का महत्व? – Shiv Ardhanarishvara Kahani

शिव के इस रूप में एक ही शरीर में शिव और शक्ति दोनों होते हैं| पौराणिक कथाओं के अनुसार  अविवाहित पुरुष यदि शिव के इस रूप की पूजा करते हैं तो उन्हें मनवांछित पत्नी मिलती है और उनका वैवाहिक जीवन भी सुखी रहता है|

Must read: शिव रुद्राष्टकम स्तुति से जल्द प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ

महादेव के अर्द्घनारीश्वर बना रूप धरने की पौराणिक कथा – Shiv Ardhanarishvara kahani

जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण पूरा कर लिया तब उन्होंने देखा कि जैसी सृष्टि उन्होंने बनायी उसमें विकास नहीं हो सकता| जिन पशु-पक्षी, मनुष्य और कीट-पतंग की रचना उन्होंने की है उनकी संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है| जब तक उनमें जान हैं वह तब तक ही जीवित रहेंगे| इसे देखकर ब्रह्मा जी परेशान हो गए| उनकी परेशानी देखकर विष्णु जी ने उन्हें शिव जी की तपस्या करने को कहा| शिवजी ब्रह्मा जी के कठोर तप से खुश हुए और उन्हें मैथुनी सृष्टि की रचना करने का आदेश दिया| ब्रह्मा जी ने शिव जी से पूछा कि मैथुनी सृष्टि कैसी होगी| मैथुनी सृष्टि का अर्थ समझाने के लिए शिव जी ने अपने शरीर के आधे भाग को नारी रूप में प्रकट किया| इसके बाद नर और नारी भाग अलग-अलग हो गये

ब्रह्मा जी नारी को प्रकट करने में असमर्थ थे इसलिए ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर शिवा यानी शिव के नारी स्वरूप ने अपने रूप से एक अन्य नारी की रचना की और ब्रह्मा जी को सौपा| इसके बाद मैथुनी सृष्टि से संसार का विकास होने लगा| शिव के नारी स्वरूप ने हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लेकर शिव से मिलन किया|

Shiv Ardhanarishvara Kahani

Must read: जानिए कैसे करनी चाहिए सावन के सोमवार में शिवलिंग की पूजा

भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप के लिए मंत्र

ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च|
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च|

Must read: शिव ताण्डव स्तोत्र और रावण के बीच है गहरा संबंध – Shiv Tandav Stotra Lyrics in Hindi

Read more stories like; Shiv Ardhanarishvara Kahani, हमारे फेसबुकट्विटर और इंस्टाग्राम पर हमें फ़ॉलो करें। हमारे वीडियो के बेस्ट कलेक्शन को देखने के लिए, YouTube पर हमें फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

The content and images used on this site are copyright protected and copyrights vests with their respective owners. We make every effort to link back to original content whenever possible. If you own rights to any of the images, and do not wish them to appear here, please contact us and they will be promptly removed. Usage of content and images on this website is intended to promote our works and no endorsement of the artist shall be implied. Read more detailed ​​disclaimer
Copyright © 2019 Tentaran.com. All rights reserved.
× How can I help you?