Shiv ke 19 avatar: शिवजी के 19 अवतारों की गाथा और उससे जुड़े रहस्यों के बारे में जानें

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Shiv ke 19 avatar – Bhagwan Shiv ke 19 Avtaro ka rahasya – सावन माह में भगवान शिव की आराधना के साथ भगवान शंकर की शास्त्रों में प्रचलित कथाएं सुनने और सुनाने का काफी महत्व होता है। इस माह में शिवजी की आराधना करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हें। धार्मिक ग्रंथों में भोलेनाथ के अनेक प्रसंग और किस्से हैं। धरती पर बढ़ते पाप को खत्म करने के लिए भगवान विष्णु ने कई अवतार लिए थे, जिसके बारे में ज़्यादातर लोग जानते हैं। तो जानिए शिव पुराण में भगवान शंकर के 19 अवतारों का वर्णन मिलता है।shiv ke 19 avatar

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1- वीरभद्र अवतार – Veerbhadra Avatar

शंकर भगवान का यह अवतार दक्ष के यज्ञ में माता सती द्वारा अपने देह का त्याग करने पर हुआ था। जब यह बात शिवजी को पता चली कि माता सती ने अपने प्राण अग्नि में त्याग दिए हैं तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्व भाग से महाभयंकर वीरभद्र प्रगट हुए। शिव के इस अवतार ने दक्ष का विध्वंस कर दिया तथा उसका सिर काटकर उसे मृत्युदंड दिया।

2- पिप्पलाद अवतार

कथा है कि पिप्पलाद ने देवताओं से पूछा- क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया शनिग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया। श्राप के प्रभाव से शनि उसी समय आकाश से गिरने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनि को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक किसी को कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है।

Shiv ke 19 avatar – shiv ji ke avtaro ke naam

3- नंदी अवतार

कथा के अनुसार शिलाद नामक एक मुनि ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने शिलाद से संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद ने अयोनिज और मृत्युहीन संतान की कामना से भगवान शिव की तपस्या की। तब शिव के वरदान से कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को भूमि से उत्पन्न एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। शिव ने नंदी को अपना गणाध्यक्ष बनाया। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ था।

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4- भैरव अवतार

भैरव को भगवान शंकर का पूर्ण रूप माना गया है। ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटने के कारण भैरव को ब्रह्म हत्या के पाप का दोष लगा था, तब काशी में भैरव को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी इसलिए काशी के लोग भैरव की भक्ति अवश्य करते हैं।

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5- अश्वत्थामा अवतार

भगवान शिव के इस अवतार की बात करें तो महाभारत के गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भगवान शंकर के अंश अवतार थे क्योंकि शिव जी को पुत्र के रूप में पाने के लिए द्रोणाचार्य ने घोर तपस्या की थी। ऐसी मान्यता है कि अश्वत्थामा आज भी अमर हैं।

6- शरभावतार

भोलेनाथ के इस अवतार में उनका स्वरूप आधा मृग और शेष शरभ पक्षी का था। बता दें कि भगवान शिव के इस अवतार ने नृसिंह भगवान की क्रोधाग्नि को शांत किया था।

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7- गृहपति अवतार

आइए अब जानते हैं भगवान शिव के सातवें अवतार यानि गृहपति अवतार के बारे में। इनके बारे में यह बताया गया है कि एक दिन मुनि को वीरेश लिंग के मध्य एक बालक दिखाई दिया था। मुनि ने बालरूपधारी शिव की पूजा की। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने शुचिष्मति के गर्भ से अवतार लेने का उन्हें वरदान दिया। जिसके बाद कालांतर में शुचिष्मति गर्भवती हुई और भगवान शंकर शुचिष्मती के गर्भ से पुत्ररूप में प्रकट हुए थे।

8- ऋषि दुर्वासा अवतार

भोलेनाथ के सभी अवतारों में ऋषि दुर्वासा का अवतार भी प्रमुख माना गया है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक, सती अनुसूइया के पति महर्षि अत्रि ने ब्रह्मा के निर्देशानुसार पत्नी सहित ऋक्षकुल पर्वत पर पुत्रकामना से घोर तप किया था। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों उनके आश्रम आए और फिर उन्होंने कहा- हमारे अंश से तुम्हारे तीन पुत्र होंगे, जो त्रिलोकी में विख्यात तथा माता-पिता का यश बढ़ाने वाले होंगे।

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9- हनुमान अवतार

शिवजी के इस अवतार के बारे में भला कौन नहीं जानता है। शंकर भगवान का यह सबसे बलशाली, बुद्धिमान और साहसी के समान माना जाता है। इस अवतार में उन्होंने एक वानर के रूप में अवतार लिया और बाद में भगवान राम की भक्ति की थी।

10- वृषभ अवतार

भगवान शंकर ने विशेष परिस्तिथियों में वृषभ अवतार लिया था। कथानुसार, जब विष्णु भगवान दैत्यों को मारने पाताल लोक तो उनको देखकर कई स्त्रियां उन पर मोहित हो गईं। इन स्त्रियों से उत्पन्न विष्णु के पुत्रों ने पाताल से पृथ्वी तक बड़ा उपद्रव मचाया था। उनसे घबराकर ब्रह्मा जी शिव जी के पास गए और रक्षा की प्रार्थना करने लगे। तभी शिवजी ने वृषभ अवतार लेकर उनका संहार किया।

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11- यतिनाथ अवतार

भगवान शंकर ने यतिनाथ अवतार लेकर अतिथि के महत्व का प्रतिपादन किया था। उन्होंने इस अवतार में अतिथि बनकर भील दंपत्ति की परीक्षा ली थी, जिसके कारण भील दंपत्ति को अपने प्राण गवाने पड़े थे।

12- कृष्ण दर्शन अवतार

शिवजी ने इस अवतार को लेकर यज्ञ आदि धार्मिक कार्यों के महत्व को बताया है। इसी कारण इस अवतार को पूरी तरह से धर्म का प्रतीक माना गया है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक, इक्ष्वाकुंशीय श्राद्धदेव की नवमी पीढ़ी में राजा नभग का जन्म हुआ था।

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13- अवधूत अवतार

शंकर भगवान ने अवधूत अवतार लेकर भगवान इंद्र के अहंकार को चूर किया था। धर्म ग्रंथों में अवतारों की कहानियों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

14- भिक्षुवर्य अवतार

भगवान शंकर देवों के देव हैं। संसार में जन्म लेने वाले हर प्राणी के जीवन के रक्षक भी हैं। भगवान शंकर काभिक्षुवर्य अवतार यही संदेश देता है।

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15- सुरेश्वर अवतार

भोलेनाथ के सुरेश्वर अवतार के पीछे की कहानी ये है कि उन्होंने एक छोटे से बालक उपमन्यु की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे अपनी परम भक्ति और अमर पद का वरदान दिया था।

16- किरात अवतार

महादेव के हर अवतार के पीछे कोई न कोई वजह रही है। भगवान शिव के किरात अवतार के पीछे की कहानी ये है कि किरात अवतार लेकर उन्होंने पाण्डुपुत्र अर्जुन की वीरता की परीक्षा ली थी।

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17- सुनटनर्तक अवतार

पार्वती के पिता हिमाचल से उनकी पुत्री का हाथ मागंने के लिए शिवजी ने सुनटनर्तक वेष धारण किया था। हाथ में डमरू लेकर शिवजी नट के रूप में हिमाचल के घर पहुंचे और नृत्य करने लगे। नटराज शिवजी ने इतना सुंदर और मनोहर नृत्य किया कि सभी प्रसन्न हो गए। जब हिमाचल ने नटराज को भिक्षा मांगने को कहा तो नटराज शिव ने भिक्षा में पार्वती को मांग लिया। इस पर हिमाचलराज अति क्रोधित हुए। कुछ देर बाद नटराज वेषधारी शिवजी पार्वती को अपना रूप दिखाकर स्वयं चले गए। उनके जाने पर मैना और हिमाचल को दिव्य ज्ञान हुआ और उन्होंने पार्वती को शिवजी को देने का निश्चय किया।

18- ब्रह्मचारी अवतार

दक्ष के यज्ञ में प्राण त्यागने के बाद जब सती ने हिमालय के घर जन्म लिया तो शिवजी को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया। पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिवजी ब्रह्मचारी का वेष धारण कर उनके पास पहुंचे। पार्वती ने ब्रह्मचारी को देख उनकी विधिवत पूजा की। जब ब्रह्मचारी ने पार्वती से उसके तप का उद्देश्य पूछा और जानने पर शिव की निंदा करने लगे तथा उन्हें श्मशानवासी व कापालिक भी कहा। यह सुन पार्वती को बहुत क्रोध आ गया। पार्वती की भक्ति व प्रेम को देखकर शिव ने उन्हें अपना वास्तविक स्वरूप दिखाया था।

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19- यक्ष अवतार

यक्ष अवतार शिवजी ने देवताओं के अनुचित और मिथ्या अभिमान को दूर करने के लिए धारण किया था।

आज हमने आपको भगवान भोलेनाथ के 19 अवतारों और उससे जुड़े रहस्यों के बारे में बताया। आशा करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इसी तरह की धार्मिक जानकारियों के लिए हमें फॉलो करना न भूलें।

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