श्रीखंड महादेव की यात्रा है बेहद कठिन, भस्मासुर से बचने के लिए यहां छिपे थे भोलेनाथ

Shrikhand mahadev yatra अक्सर लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा को ही सबसे दुर्गम मानते आए हैं, पर इससे भी दुर्गम हिमाचल प्रदेश के श्रीखंड महादेव की यात्रा है। यहां तक जाने के लिए श्रृद्धालुओं को 18,570 फीट का पथरीला रास्ता तय करना पड़ता है जिस वजह से इस यात्रा को सबसे खतरनाक माना जाता है। यह यात्रा हर साल लगभग जुलाई के समय में शुरू होती है जो लगभग 15 दिनों तक चलती है। आज हम आपको इस यात्रा से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहा हैं।

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Shrikhand mahadev yatra

श्रीखंड महादेव यात्रा का पौराणिक महत्व

  • एक पौराणिक मान्यता के अनुसार भस्मासुर नाम का राक्षस हुआ करता था जो पूरे विश्व पर राज करना चाहता था। अपनी इस ज़िद को पूरा करने के लिए उसने भगवान शिव की तपस्या करना शुरू किया।
  • भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वरदान के लिए कहा।  भस्मासुर ने अमरत्व का वरदान मांगा।
  • अमर होने का वरदान सृष्टि के नियमों के विपरीत था। इसके बाद उसने ऐसा वरदान मांगा जिससे वह किसी भी चीज पर हाथ रखे वह भस्म हो जाए और भगवान शिव ने उन्हें यह वरदान दे दिया।

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  • वरदान मिलते ही भस्मासुर भगवान शिव को ही भस्म करने के लिए उनके पीछे दौड़ पड़े। इससे बचने के लिए भगवान शिव, विष्णु भगवान के पास पहुंचे और उन्हें पूरी बात बताई।
  • इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी का अवतार धारण किया और भस्मासुर के सामने गए मोहिनी के रूप को देखकर भस्मासुर मुग्ध हो गया। मोहिनी ने भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने को कहा। भस्मासुर भी तैयार हो गया।
  • वह मोहिनी के साथ नृत्य करने लगा। इसी बीच चतुराई दिखाते हुए मोहिनी ने नृत्य के दौरान अपना हाथ सिर पर रखा। इसे देखकर भस्मासुर ने जैसे ही अपना हाथ अपने सिर पर रखा वह उसी समय राख में बदल गया।
  • इस तरह विष्णु जी ने भस्मासुर को अपने जाल में फंसाकर उन्हें खुद के ही हाथों जला दिया।
  • भस्मासुर राक्षस जिस जगह पर गिरा वह जगह पूरी तरह से लाल हो गई। आज भी दूर से देखने पर यहां का पानी और मिट्टी लाल दिखाई देती है।
  • दंतकथा के अनुसार पांडवों ने भी कुछ समय यहां गुजारा था।
  • श्रीखंड महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 72 फीट है। जिसे देखने के लिए हर साल हजारो श्रद्धालु यहां आते हैं।

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श्रीखंड महादेव किस तरह से पहुंचे

  • श्रद्धालुओं को इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर की सीधी  चढ़ाई करनी पड़ती है। ग्लेशियरों से होकर गुजरने वाला यह रास्ता खतरों से भरा होता है।
  • श्रीखंड महादेव का रास्ता बुशहर(शिमला से 130 कि० मी०) से शुरू होता है। जिसके बाद यहां से निरमण्ड और उसके बाद बागीपुल और आखिर में जांव के बाद पैदल यात्रा शुरू होती है।
  • श्रीखंड महादेव में जाते समय निरमंड में सात मंदिर, जावों में माता पार्वती सहित नौ देवियां, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, सिंहगाड, जोतकाली, ढंकद्वार, बकासुर बध, ढंकद्वार कुंषा आदि जगहों के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं।  
  • इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बीचबीच में लंगर भी लगाए जाते हैं और उनके रहने के लिए टैंट की सुविधा भी की जाती है।
  • श्रीखंड महादेव यात्रा के लिए पंजीकरण फीस 150 रूपए होती है। इसके अलावा यहां आने वाले यात्रियों को मेडिकल सर्टिफिकेट की भी ज़रूरत होती है।

श्रद्धालुओं के​ लिए लंगर की खास सुविधा

  • श्रीखंड महादेव की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रीखंड कैलाश लंगर कमेटी द्धारा कुल्लू (हिसाचल प्रदेश) में भण्डारे का आयोजन किया जाता है।

Hardik Avinandan

  • इस कमेटी द्धारा के श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे मुफ्त लंगर, दवाईयां तथा रात में ठहरने के लिए कम्बल और नाश्ते की व्यवस्था भी की जाती है। इसके अलावा शाम के समय भोले बाबा की आरती भी की जाती है।
  • श्रीखंड महादेव के दर्शन करने के लिए 8,570 फीट की ऊँचाई पर चढ़ना पड़ता है। इस दौरान कैलाश लंगर कमेटी द्धारा सफाई अभियान भी चलाया जाता है, जिससे रास्तों को साफ रखा जा सके।

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  • श्रीखंड महादेव तक पहुंचने के लिए शिमला जिला के रामपुर से कुल्लू जिला के निरमंड से होकर बागीपुल और जाओं तक गाड़ियों और बस द्धारा पहुंचा जाता है।
  • शिमला से रामपुर 130 किलोमीटर, रामपुर से निरमंड 17 किलोमीटर,निरमंड से बागीपुल 17 किलोमीटर, बागीपुल से जाओं करीब 12 किलोमीटर है। जहां से आगे श्रीखण्ड महादेव यात्रा करीब 35 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है।

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