उत्तराखंड के ये सैनिक देश के लिए हुए कुर्बान

Soldiers of uttarakhandउत्तराखंड के सैनिकों ने भारत की रक्षा के लिए बहुत कुछ किया। आज हम  उत्तराखंड के कुछ ऐसे ही सैनिकों की बात करेंगे जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान तक की बाज़ी लगा दी। इन सैनिकों की शहादत को पूरा देश सलाम करता है। इन सैनिकों ने देश की रक्षा करते हुए कई स्वर्ण पदक हासिल किए। उत्तराखंड के ये सैनिक देश के लिए हुए कुर्बान

मेजर राजेश सिंह अधिकारी

मेजर राजेश सिंह अधिकारी

मेजर राजेश सिंह का जन्म 25 दिसंबर 1970 उत्तराखंड के नैनीताल में हुआ। राजेश इंडियन मिलिट्री एकेडमी से 11 दिसंबर, 1993 को सेना में भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध के दौरान 30 मई को उनकी यूनिट को तोलोलिंग चोटी पर कब्ज़ा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। जब मेजर अधिकारी अपने सैनिकों के साथ लक्ष्य की ओर बढ़े तो दुश्मनों ने बंकरों से उनपर हमला करना शुरू कर दिया। भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने बंकरों पर कई ग्रेनेड फेंके और दुश्मनों को मार गिराया। इस दौरान वे गंभीर रूप से ज़ख्मी हुए और शहीद हो गए। तोलोलिंग फतह करने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। 1999 में उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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बिपिन चंद्र जोशी

बिपिन चंद्र जोशी

जनरल बिपिन चंद्र का जन्म 5 दिसंबर 1935 पिथौरागढ़ में हुआ। बिपिन भारतीय सेना के 17वे चीफ आर्मी स्टाफ रहे थे। इन्होंने कई पदक हासिल किए। अति विशिष्ट सेवा मेडल,  सामान्य सेवा मेडल, पश्चिमी स्टार, स्पेशल सर्विस मेडल, रक्षा मेडल, सैन्य सेवा मेडल, विदेश सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। 58 साल की उम्र में इनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई। पिथौरागढ़ में उनके सम्मान में जनरल बीसी जोशी आर्मी पब्लिक स्कूल की स्थापना 1 99 3 में की गई।

एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी

एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी

देवेंद्र कुमार का जन्म 4 जुलाई 1954 उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर में हुआ। ये भारत के 21वें नौसेनाध्यक्ष थे।  डी. के. जोशी ने 01 अप्रैल 1974 को भारतीय नौसेना के एक्‍जीक्‍यूटिव ब्रांच में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग 38 वर्ष के अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने विभिन्न कमान, कर्मचारी और निर्देशात्मक पदों पर हुई नियुक्ति के दौरान अपनी सेवाएँ दीं। उन्होंने सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग में 1996 से 1999 के दौरान रक्षा सलाहकार के रूप में भी सेवाएँ दी। 26 फ़रवरी 2014 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ऐसा करने वाले वे भारत के पहले नौसेनाध्यक्ष हैं। इन्हें परम विश्व सेवा पदक, अति विश्व सेवा पदक, नौसेना पदक, विश्व सेवा पदक, ऑपरेशन पराक्रम पदक से सम्मानित किया गया।

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