जानिए महाशक्तिशाली महामृत्युंजय मंत्र की रचना किसने, कब और क्यों की

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Story of maha mrityunjaya mantra in hindiॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ महामृत्युंजय मंत्र जिसे त्रयंबकम मंत्र भी कहा जाता है। ये यजुर्वेद के रूद्र अध्याय में शिव भगवान की स्तुति की गई एक वन्दना है। इस मन्त्र में शिव जी को मृत्यु को जीतने वाला बताया गया है। इस मंत्र के कई नाम हैं। इसे रुद्र मंत्र और मृत-संजीवनी मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। ऋषि-मुनियों द्वारा महा मृत्युंजय मंत्र को वेद का ह्रदय कहा गया है। इस मंत्र का स्थान सर्वोच्च है। तो चलिए आपको बताते हैं महाशक्तिशाली महामृत्युंजय मंत्र की रचना किसने, कब और क्यों की। story of maha mrityunjaya mantra in hindi

Story of maha mrityunjaya mantra in hindi – महाशक्तिशाली महामृत्युंजय मंत्र की रचना किसने, कब और क्यों की

maha mrityunjaya mantra in hindi – महामृत्युंजय मंत्र – om tryambakam mantra 

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

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कैसे हुई महामृत्युंजय मंत्र की रचना – mahamrityunjaya mantra ki utpatti – Story of maha mrityunjaya mantra in hindi 

पौराणिक कथा के अनुसार मृकण्ड नामक एक ऋषि शिव भगवान का अनन्य भक्त था। वो उनकी बहुत ज़्यादा पूजा-अर्चना करता था, लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं थी। ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी था। एक दिन मृकण्ड ने सोचा कि वो शिव भगवान को प्रसन्न करेंगे और शिव जी प्रसन्न होकर उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान अवश्य देंगे। मृकण्ड ने शिव जी के लिए घोर तप करना शुरु कर दिया। भोलेनाथ ऋषि की तपस्या से खुश हो गए और उसे दर्शन दिए। तब शिव जी ने मृकण्ड को वरदान मांगने के लिए कहा, तो ऋषि ने पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगा। भगवान शंकर ने उन्हें विधान के विपरीत जाकर पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया। भगवान शंकर ने इस वरदान को देते हुए कहा कि इस खुशी के साथ-साथ तुम्हें कुछ दुख भी होगा, मृकण्ड ऋषि ने उनके इस वरदान को स्वीकार किया।

कुछ समय बाद शंकर जी के आशीर्वाद से ऋषि को पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने मार्कण्डेय रखा। तभी मृकण्ड ने ज्योतिषियों को बालक की कुंडली दिखाई तो ज्योतिष ने उन्हें बताया कि ये विल्क्षण बालक अल्पायु है, यानी इसकी उम्र केवल 12 साल है। ये बात सुनते ही ऋषि की सारी खुशी दुख में बदल गई, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी को समझाया कि जिस भोलेनाथ ने हमें बालक वरदान के रूप में भेंट किया है, वहीं इसकी रक्षा भी करेंगे। धीरे-धीरे मार्कण्डेय ऋषि बड़ा होने लगा, उन्होंने अपने पिता से शिवमंत्र की दीक्षा ग्रहण की। एक दिन उनकी माता ने दुखी होकर अपने पुत्र को बता दिया कि वे अल्पायु है। जब ऋषि मार्कण्डेय को ये पता चला तो उन्होंने मन ही मन ये प्रण कर लिया कि वे अपने माता-पिता की खुशी के लिए शिव जी से दीर्घायु का वरदान प्राप्त करेंगे।

मार्कण्डेय ने शिवजी की आराधना के लिए ‘महामृत्युंजय मंत्र’ की रचना की और शिव मंदिर में बैठकर अखंड जाप करने लगे। आयु का समय पूरा होने पर यमदूत उन्हें लेने आ गए, लेकिन यमदूतों ने देखा कि मार्कण्डेय शिव जी की आराधना में लीन है, तो उन्होंने थोड़ी देर प्रतीक्षा की, मार्केण्डेय ने अखंड जाप का संकल्प लिया हुआ था। इस दौरान यमदूतों की मार्केण्डेय को छूने की हिम्मत नहीं हुई और वो वापस यमलोक लौट गए। वहां पहुंचकर उन्होंने यमराज को बताया कि वे बालक तक पहुंचने का साहस नहीं कर पाए। ये बात सुनकर यमराज को गुस्सा आ गया और उन्होंने कहा कि मैं खुद जाकर उसे लेकर आऊंगा। यमराज मार्कण्डेय के पास पहुंच गए। जब मार्कण्डेय ने देखा कि यमराज आ गए हैं तो उसने ज़ोर-ज़ोर से महामृत्युंजय मंत्र का जप करना शुरु कर दिया और शिवलिंग से लिपट गया। यमराज ने उसे शिवलिंग से खींचकर ले जाने की कोशिश की, लेकिन तभी ज़ोर की हुंकार से मंदिर कांपने लगा और शिवलिंग से स्वयं महाकाल शिव जी प्रकट हो गए। शिव जी ने हाथों में त्रिशूल लेकर यमराज को कहा कि तुमने मेरी साधना में लीन भक्त को अपनी ओर खींचने का साहस कैसे किया? यमराज शिव भगवान के प्रचंड रूप से कांपने लगे और कहा कि प्रभु मैं आप का सेवक हूं, आपने ही जीवों से प्राण हरने का निष्ठुर कार्य मुझे सौंपा है। ये सुनकर भगवान शंकर का क्रोध थोड़ा शांत हुआ, तब भगवान ने यमराज से कहा कि मैं अपने भक्त की भक्ति से बहुत प्रसन्न हूं और मैंने उसे दीर्घायु होने का वरदान दिया है, तुम अब इसे नहीं ले जा सकते। यम ने कहा प्रभु आपकी आज्ञा सर्वोपरि है। मैं आपके भक्त मार्कण्डेय द्वारा रचित ‘महामृत्युंजय का पाठ’ करने वाले को त्रास नहीं दूंगा। महाकाल की कृपा से मार्केण्डेय दीर्घायु हो गया। उनके द्वारा रचित ‘महामृत्युंजय मंत्र’ काल को भी परास्त करता है।

Story of maha mrityunjaya mantra in hindi

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