Surya Dev ko Jal kyo chadhate hai – जानिए सूर्यदेव को क्यों चढ़ाया जाता है जल

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Surya dev ko jal kyo chadhate hai –  surya dev ko jal kaise dena chahiye – ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव को सभी ग्रहों का अधिपति माना गया है। माना जाता है कि ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की पूजा करनी चाहिए। रविवार को सूर्य का विशेष दिन माना गया है। सूर्य को नियमित रूप से जल अर्पित करने से बहुत लाभ होता है। जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाया जाए तो आपका भाग्योदय होने से कोई नहीं रोक सकता। तो चलिए आपको बताते हैं सूर्यदेव को क्यों चढ़ाया जाता है जल और जल चढ़ाते वक्त किस मंत्र का जाप करना चाहिए साथ ही बताएंगे नियम भी।surya dev ko jal kyo chadhate hai

Surya dev ko jal kyo chadhate hai – सूर्यदेव को क्यों चढ़ाया जाता है जल – surya ko jal kyu dete hai

  • ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाना बहुत ही शुभ होता है। सूर्य को प्रतिदिन जल देने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत होती है।
  • ऐसा माना जाता है कि सूर्य को जल चढ़ाने से स्वास्थ्य में सुधार होता है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। सूर्य आपकी ऊर्जा के स्तर को सुधारता है। शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक रहते हो।
  • सुबह की सूरज की किरणें फायदेमंद मानी जाती हैं। सूर्य अपने प्रभाव से आपकी आंखों को नियंत्रित करता है। अगर आप प्रतिदिन नियमित रूप से सूर्यदेव को जल नहीं चढ़ा पाते हैं तो आप रविवार के दिन सूर्यदेव को जल अर्पित कर सकते हैं। रविवार का दिन सूर्य देव को बहुत प्रिय है इसलिए रविवार को सूर्यवार भी कहा जाता है।
  • नियमित रूप से अगर आप रविवार के दिन सूर्यदेव को जल चढ़ाएंगे तो इसका उतना ही शुभ फल आपको मिलेगी जितना कि रोज़ाना जल चढ़ाने से मिलता है। जल चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि अर्घ्य तभी दें जब सूर्य पूर्व दिशा में हो। पूर्व दिशा को सूर्यदेव के उदय का मार्ग कहा जाता है जो स्वयं जीवन और शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।

Surya dev ko jal kyo chadhate hai

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ऐसे चढ़ाएं सूर्य को जल – surya dev ko jal chadhane ke niyam – surya ko jal me kya dale

  • सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और फिर सूर्य को अर्घ्य दें।
  • इसके लिए तांबे के एक लोटे में जल भरें और इसमें फूल, शहद, चावल,चीनी डालकर सूर्य को जल चढ़ाएं।
  • ऐसे स्थान पर खड़े होकर अर्घ्य दें जहां से उगता सूरज स्पष्ट रूप से आपको दिखाई दे।
  • अर्घ्य देने के बाद सूर्य के आगे हाथ जोड़े और ज़मीन पर उस जगह को स्पर्श करें जहां जल प्रवाह किया है।
  • मानसून के समय जब सूरज स्पष्ट रुप से दिखाई नहीं देता है, तब पूर्व दिशा की ओर मुंह करके अर्घ्य दें क्योंकि दिन में सूर्य की स्थिति इसी दिशा में होती है।
  • जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र का उच्चारण करें।

Surya dev ko jal kyo chadhate hai

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सूर्य मंत्र – surya ko jal dene ka mantra

ॐ गृहिणी सूर्य आदित्य ओम” या “ओम गृहिणी सुरमा नमः।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौ स: सूर्याय नम: मंत्र जप करें।

इन मंत्रों का कम से कम 11 बार जप करें।

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