Surya grah ko majboot karne ke upay – मंत्रो और स्त्रोतों के जाप से करें सूर्य ग्रह को प्रसन्न, खुलेगा भाग्य होगी धन वर्षा

Please follow and like us:

Surya grah ko majboot karne ke upay – आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि सूर्य ग्रह क्या है और अगर किसी जातक का सूर्य कमज़ोर है तो वो उसको किन – किन तरीको से ठीक कर सकता है। औषधियों द्वारा,यंत्रो, रत्नों, दान, मन्त्रो द्वारा व अन्य तरीकों से आप अपने कमज़ोर सूर्य ग्रह को मजबूत कर सकते हैं। लेकिन कोई भी उपाय करने से पहले आपको ये जानना बहुत ज़रुरी है कि आपका सूर्य ग्रह कितना कमज़ोर है और ये जानने के लिए आप हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क कर जानकारी ले सकते हैं। मेष,धनु,सिंह लग्न के जातकों के लिए सूर्य कारक ग्रह होता है और कारक ग्रह के दान नहीं होते। तो चलिए आपको बताते हैं इसके उपाय।

surya grah ko majboot karne ke upay

सूर्य-ग्रह दोष निवारण – Surya grah ko majboot karne ke upay

  • सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। मेष राशि में ये उच्च का व तुला राशि में नीच का होता है। इसका रंग लाल है। सूर्य की दिशा पूर्व व धातु सोना व ताम्बा है। यह पुरुष ग्रह है व अग्नि तत्व का है।
  • 9 गृहों में इसको राजा की उपाधि दी गयी है। प्रतिनिधि पशु लाल गाय है। यह सातवीं दृष्टि से पूर्ण रूप से देखता है।
  • इसकी अवस्था वृद्ध है। सूर्य के मित्र चन्द्र, मंगल,गुरु हैं। शुक्र व शनि इसके शत्रु हैं। सूर्य एक राशि में एक माह तक रहता है। इसका स्वभाव उग्र और गुण सत्व है। सूर्य ग्रह दोष निवारण हेतु कई उपाय हैं। तो जानते हैं ये विभिन्न उपाय क्या हैं।

मंत्रो और स्त्रोतों का जाप:- Surya grah ko majboot karne ke upay

  • सूर्य ग्रह दोष निवारण हेतु इससे संबंधित मंत्रो और स्त्रोतों का जाप किया जाता है। यह जाप किसी भी शुक्ल पक्ष के रविवार से शुरू किया जा सकता है। किसी भी मंत्र और प्रभु के नाम को बार – बार दोहराने को जाप कहते हैं। जाप से अचेत मन जागृत होता है।

Must read- पढ़िए कुंडली में जब तीन ग्रह एक साथ हो तो उनका क्या फल होता है

मंत्रो का जाप चार प्रकार से किया जाता है

  • पहली विधि वैखरी कहलाती है। इसमें उच्च स्वर में जाप किया जाता है। इस प्रकार के जाप में मंत्र स्पष्ट सुनाई पड़ते हैं।
  • जाप का दूसरा प्रकार है मध्यमा। इस विधि में होंठ तो हिलते हैं पर ध्वनि सुनाई नहीं देती। मन्त्र जाप अंदर चलता रहता है।
  • तीसरी विधि पश्यन्ति कहलाती है। इस विधि में न तो होंठ हिलते हैं और न कोई स्वर सुनाई देता है। जाप मन ही मन में चलता रहता है।
  • चौथी विधि परा कहलाती है। इस विधि में मंत्र करता स्वयं ही मन्त्र मय हो जाता है। जाप स्वयं ही चलता रहता है।
  • इन विधियों में पहली से दूसरी व दूसरी से तीसरी व तीसरी से चौथी विधि उत्तम है, लेकिन जातक को मंत्र की शुरुआत पहली विधि से करनी चाहिए। मंत्र जाप के लिए सुबह सूर्य उदय का समय अच्छा होता है।
  • मंत्र जाप पूर्व मुखी या उत्तर मुखी होकर करना चाहिए। प्रतिदिन एक निश्चित समय पर जाप करना शुभ होता है। जाप के लिए स्थान भी निश्चित कर लें। प्रतिदिन एक ही जगह पर जाप करने से अधिक लाभ प्राप्त होता है। जाप के समय धूप, अगरबत्ती लगा लेनी चाहिए।
  • जिस मंत्र का आप जाप कर रहे हैं उसकी छवि मन में होनी चाहिए। जाप के लिए कुश, जो एक प्रकार की घास है सबसे उपयुक्त है। इससे जाप से उत्पन्न ऊर्जा पृथ्वी में नहीं जाती। जाप के लिए पद्मासन सबसे उपयुक्त है। जाप करते समय सिर,गर्दन,कमर सीधी रहनी चाहिए।
  • मंत्र जाप की माला भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसे बाएं हाथ से नहीं छूना चाहिए। इस माला को किसी और व्यक्ति के हाथ मे नहीं देना चाहिए। इनमें रुद्राक्ष, तुलसी,शंख,कमल बीज,मोती, मणि, रत्न,चन्दन,सोने,चांदी या कुश की माला होती है।
  • ब्राह्मण कन्या द्वारा सूत के धागे में पिरोई गयी माला उत्तम होती है। माला के दाने एक जैसे होने चाहिए। माला में 108 दाने होने चाहिए। ऊपर जो एक दाना होता है उसको सुमेरु बोलते हैं माला के 108 दाने पढ़ने पर सुमेरु को लांघना नहीं चाहिये अपितु माला को पलट लेना चाहिए।
  • जाप करते समय माला नाभि से ऊपर होनी चाहिए। नाभि से ऊपर किया गया जाप देवो को समर्पित होता है व नीचे की ओर किया गया जाप राक्षसों को समर्पित होता है।
  • यदि माला टूट जाये तो उसे तुरंत दोबारा बना लेनी चाहिए। अगर कोई दाना खो जाए तो वैसा ही दाना लेकर पिरो देना चाहिए। माला को गो मुखी या कपड़े से ढककर रखना चाहिए। अशुद्ध अवस्था में माला को हाथ नहीं लगाना चाहिए। सूर्य ग्रह दोष निवारण के लिए निम्नलिखित विनियोग और ध्यान करना चाहिए।

Surya grah ko majboot karne ke upay

विनियोग:-

  • ऊँ आकृष्णेनि मन्त्रस्य हिरण्यस्तूपांगिरस ऋषि स्त्रिष्टुप्छन्द: सूर्यो देवता सूर्यप्रीत्यर्थे जपे विनियोग:

ध्यान:-

ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती।
नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:॥
केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी।
हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र॥
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाधुतिम्।
तमोहरि सर्वपापध्‍नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं योन तन्द्रयते।
चरश्चरैवेति चरेवेति!

उपरोक्त विनियोग व ध्यान के बाद कम से कम एक माला इस मंत्र की करे

  • ॐ घृणि:सूर्याय नमः
  • सूर्य जाप की कुल संख्या 7000 है पर कल युग में चार गुणा यानी 28000 जाप करनी चाहिए। जाप पूर्ण होने पर इसके दसवें हिस्से यानी 2800 मंत्रो से आहुति दी जाती है।
  • हवन के समिधा में आक की लकड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि खुद जाप न कर सके तो किसी योग्य पंडित से जाप कराना श्रेष्ठ है। जाप तब आरम्भ करना चाहिए जब शुभ मुहूर्त में अग्नि का वास पृथ्वी पर हो। इसके पश्चात जाप में हुई गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए।

Surya grah ko majboot karne ke upay

Must read- जानिए कैसा होता है सिंह राशि के जातकों का स्वभाव, गुण और व्यक्तित्व

यंत्र द्वारा सूर्य दोष निवारण:-

  • सूर्य ग्रह दोष को यन्त्र द्वारा भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए शुभ मुहूर्त में पूर्व में यन्त्र की स्थापना की जाती है। यदि रवि पुष्य या रवि पुर्नवसु योग हो तो उत्तम है। सूर्य यन्त्र को स्वर्ण पत्र,ताम्र या भोज पत्र पर बनाये।
  • यन्त्र बनाने के लिए अष्टगन्ध या लाल चंदन का उपयोग अनार की कलम से करना चाहिए। इस मंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करके गायत्री मंत्र से शुद्ध कर लेना चाहिए। सूर्य गायत्री मंत्र इस प्रकार है, ॐ आदित्याय च विदनहे प्रभाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात।

Surya grah ko majboot karne ke upay

व्रत-उपवास द्वारा सूर्य दोष निवारण

  • इसके लिए रविवार का व्रत करना चाहिए। विधान के अनुसार पोश माह के प्रथम या अश्विन माह के अंतिम रविवार से ये व्रत प्रारम्भ होता है। परंतु अगर इन माह के अतिरिक्त भी व्रत शुरू करना है तो शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से शुरू करें।
  • इस व्रत में नमक का सेवन नहीं किया जाता। दही चावल का भोजन एक वक्त करे तो उत्तम रहता है। सूर्य उदय से पूर्व ही उपवास खोल देना चाहिए। उपवास वाले दिन दिन में नहीं सोना चाहिए। इस दिन कटु वचन व झूट न बोले।
  • ईर्ष्या द्वेष जैसे भाव मन में न आने दे। किसी की निन्दा न करें। उपवास में पान भी नहीं खाया जाता। उपवास वाले दिन मन में किसी प्रकार के विकार नहीं आने चाहिए। व्रत वाले दिन सूर्य देव का ध्यान करते रहे। अपने मन को सात्विक रखें। इस प्रकार व्रत रखने से सूर्य दोष से मुक्ति पाई जाती है।

ऐसे करें पूजा

  • ब्रह्म मुर्हूत अर्थात सूर्य उदय से पहले दैनिक कर्म और स्नान आदि कर लेना चाहिए।
  • अब ठीक सूर्य उदय पर सूर्य नारायण को जल चढ़ाना चाहिए।
  • जल में गुड़,चावल,लाल पुष्प,रोली डाल लेनी चाहिए। जब सूर्य पूर्ण लालिमा लिए हो, इस जल को तुलसी के पौधे में डाल दें।
  • अब सूर्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करें और कुछ देर सूर्य नारायण का ध्यान करें।

Surya grah ko majboot karne ke upay

औषधियों द्वारा सूर्य ग्रह दोष निवारण:-

  • कुछ औषधियां भी हैं जिन से स्नान कर सूर्य दोष का निवारण किया जाता है। इसके लिए मैनसिल, इलायची, कुमकुम, देवदार, उशीर, ज्येष्ठी, मधु, मुलेठी,केसर,रोली, लाल कनेर या गुड़हल के फूलों के रस को मिलाकर इनके उबटन से स्नान करना चाहिए।
  • यदि ये औषधियां पर्याप्त मात्रा में न मिले तो जितनी मिले उन्हें जल में मिलाकर स्नान कर लें। इसके बाद लाल पुष्प सूर्यदेव को अर्पण करें। इस प्रकार भी सूर्य दोष निवारण होता है।

Must read- जानिए कुंडली में जब दो ग्रह एक साथ बैठे हों, तो क्या होता है

रत्न द्वारा सूर्य ग्रह दोष निवारण:-

  • सूर्य का रत्न माणिक है। इसके लिए माणिक को रविवार,सोमवार व गुरुवार शुक्ल पक्ष में खरीदना चाहिये। इसको अंगूठी में जड़वाने का समय पुष्य नक्षत्र उत्तम है या कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा साधा में भी ये कार्य किया जा सकता है।
  • नग खण्डित नहीं होना चाहिए। माणिक इस प्रकार जड़ना चाहिए कि उसका निचला हिस्सा उंगली को छुए। इस अंगूठी को सूर्य उदय के समय धारण करना चाहिए। पहनने से पहले अंगूठी को कच्चे दूध में रखना चाहिए। फिर गंगा जल से साफ कर लेना चाहिए। अगर गंगा जल नहीं है तो तांबे में रखे 12 घण्टे पुराने जल से भी धो सकते हैं अब लाल कपड़े पर सूर्य यन्त्र बनाये व अंगूठी उस पर रख दें 108 बार सूर्य मन्त्र पढ़े और अंगूठी को धारण कर लें।

Surya grah ko majboot karne ke upay

माणिक का विकल्प:-

  • माणिक एक महंगा रत्न है अगर कोई खरीद न सके तो इसके उपरत्न पहन सकता है। गार्नेट,लाल स्पाइनल,लाल जर्कन,लाल त्रुमनल का उपयोग कर सकते हैं। अगर ये भी खरीद नहीं सकते तो सफेद आक या बेल की जड़ कंठ में धारण करें।

Must read- जानिए जन्म कुंडली के इन योगों के बारे में, जो इंसान को दिलाते हैं राजयोग

दान द्वारा सूर्य ग्रह दोष निवारण:-

  • इसके लिए प्रातः काल सूर्य उदय के समय किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए। दान की वस्तुओं में गेहूं, ताम्बा, गुड़, खस, लाल पुष्प, लाल कपड़ा, सोना, घी, लाल चंदन, माणिक, लाल गाय व सूर्य यन्त्र शामिल है। यह दान रविवार को होता है।
  • यदि रवि पुष्य या रवि पुर्नवसु हो तो अति उत्तम है। इन वस्तुओं में से अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करें। गेहूं स्वयं के वज़न के बराबर होना चाहिए। शेष वस्तुएं सामर्थ्य अनुसार होनी चाहिए।

Surya grah ko majboot karne ke upay

दान की विधि:-

  • उपरोक्त वस्तुओं में जैसे गेहूं के कुछ दाने,एक लाल पुष्प,घी की एक बूंद इत्यादि और दक्षिणा हाथ में रख कर संकल्प लेना चाहिए। संकल्प होने के बाद समस्त वस्तुओं को ब्राह्मण या योग्य व्यक्ति को देना चाहिए।

अगर आप का अपनी कुंडली के बारे में कोई सवाल है तो नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और अपनी डिटेल्स हमें दे। हम कोशिश करेंगे कि हमारे एक्सपर्ट्स आपके सवालों के जवाब दें।

पूछताछ करें!!

Must read- कैसे होते हैं वृषभ राशि के लोग, जानिए उनका स्वभाव, व्यक्तित्व, गुण और दोष

Read more stories like; Surya grah ko majboot karne ke upay, हमारे फेसबुकट्विटर और इंस्टाग्राम पर हमें फ़ॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

The content and images used on this site are copyright protected and copyrights vests with their respective owners. We make every effort to link back to original content whenever possible. If you own rights to any of the images, and do not wish them to appear here, please contact us and they will be promptly removed. Usage of content and images on this website is intended to promote our works and no endorsement of the artist shall be implied. Read more detailed ​​disclaimer
Copyright © 2021 Tentaran.com. All rights reserved.
× How can I help you?