ये पांच राज्य करेंगे मोदी की किस्मत का फैसला

These five states will decide Modi fate – पांच विधानसभा के नतीजों ने मोदी को तगड़ा झटका दिया, जबकि ये विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए वरदान साबित हुए। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने नाटकीय परिवर्तन किया। इन नतीजों से सीधा ये अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि मोदी को लोकसभा चुनाव जीतने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

These five states will decide Modi fate

देश में लगभग चार महीने के बाद लोकसभा के चुनाव होने हैं और उससे ठीक पहले बीजेपी का इस तरह से हारना जनता के रोष को दर्शाता है। 2019 के लोकसभा में कौन प्रधानमंत्री बनेगा, ये तो अभी कोई नहीं बता सकता, लेकिन ये पांच राज्य किसी की भी किस्मत बदल सकते हैं।

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  • उत्तर प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • पश्चिम बंगाल
  • बिहार
  • तमिलनाडु

ये ऐसे पांच राज्य हैं जिनके पास सबसे ज़्यादा लोकसभा सीटें हैं।

  • उत्तर प्रदेश- 80 सीटें
  • महाराष्ट्र – 48 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 42 सीटें
  • बिहार – 40 सीटें
  • तमिलनाडु – 39 सीटें

इन पांचों राज्यों में कुल 249 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से 2014 में बीजेपी और उसके गठबंधन को 148 सीटें मिली थी। कांग्रेस को मात्र 10 सीटें और अन्य के खातों में 91 सीटें आईं थीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में एक बार फिर से सबकी नज़र इन राज्यों पर रहेगी।

उत्तरप्रदेश

देश में किसकी सरकार बनेगी ये काफी हद तक उत्तरप्रदेश की जनता पर निर्भर करता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 80 में से 71 सीटें जीती थी। अपना दल की 2 सीटों को मिलाकर एनडीए को 73, कांग्रेस 2 और सपा को 5 सीटें मिलीं।

पिछले दिनों तीन लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। कांग्रेस, सपा और बसपा के गठबंधन के कारण बीजेपी को इन तीनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। अब अगर 2019 में सपा-बसपा और कांग्रेस का गठबंधन होता है, तो बीजेपी का चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है। बीजेपी के लिए 2014 जैसे नतीजे 2019 में दोहराना आसान नहीं होगा, जबकि कांग्रेस को गठबंधन का फायदा मिल सकता है।

महाराष्ट्र

2019 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की अहम भूमिका रहेगी। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 23, शिवसेना 18, कांग्रेस 2, एनसीपी को 4 और स्वाभिमान को 1 सीट मिली थी।

2019 में महाराष्ट्र का चुनावी समीकरण बिल्कुल अगल होने वाला है क्योंकि बीजेपी और शिवसेना अलग- अलग चुनाव लड़ने का संकेत दे चुकी हैं, जबकि कांग्रेस और एनसीपी एक साथ चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी की राहें और मुश्किल हो सकती हैं।

बिहार

बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 22, एलजेपी औऱ आरएलएसपी को 3 सीटें मिली थीं। अब आरएलएसपी एनडीए से अलग हो गई है और नितीश कुमार की पार्टी जेडीयू एक बार फिर एनडीए का हिस्सा बन चुकी है।

कांग्रेस और आरजेडी को एक साथ चुनाव लड़ने और तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा मिल सकता है।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। यहां 2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को 34 और बीजेपी को मात्र 2 सीटें ही मिली। स्थानीय चुनावों में बीजेपी का ग्राफ बढ़ा है। बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए 22 सीटों का लक्ष्य रखा है, लेकिन अगर टीएमसी और कांग्रेस का गठबंधन होता है, तो बीजेपी की यहां भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

तमिलनाडु

लोकसभा चुनावों की दृष्टि से तमिलनाडु भी बहुत अहम है। इस राज्य में 39 लोकसभा सीटें हैं।

2014 के चुनावों में एआईडीएमके को 37 सीटें और बीजेपी को सिर्फ 1 सीट मिली थी। एआईडीएमके और बीजेपी का अगर गठबंधन होता है, तो बीजेपी को इसका फायदा मिल सकता है।

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