जानें कैसे पांडवों द्वारा किया गया शिव के सबसे ऊंचे मंदिर तुंगनाथ का निर्माण

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Tungnath mandir ke rochak tathya – देवो के देव भगवान महादेव की महिमा का बखान कई पौराणिक कथाओं में किया गया है| आज हम आपको शिव के सबसे ऊंचे मंदिर तुंगनाथ के बारे में बताएंगे| तुंगनाथ दुनिया का ही नहीं बल्कि पंच केदार मंदिरों में भी सबसे ऊंचा शिव मंदिर है| यह रुद्रप्रयाग जिले के तुंगनाथ की पहाड़ियों में स्थित है| तो चलिए आपको मंदिर से जुड़ी कहानी के बारे में बताते हैं|

tungnath mandir ke rochak tathya

Tungnath mandir ke rochak tathya –  तुंगनाथ शिव मंदिर के बारे में रोचक बातें

तुंगनाथ मंदिर की कहानी | tungnath mandir story

  • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि तुंगनाथ का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था| एक बार ऋषि व्यास ने पांडवों को सलाह दी कि भगवान शिव द्वारा माफ़ करने पर उनके ऊपर से अपने रिश्तेदारों कौरवों को मारने का दोष मुक्त हो सकता है| तब पांडव शिव की खोज में गए, लेकिन शिव उनसे मिलना नहीं चाहते थे|
  • पांडवों को दूर रखने के लिए, शिव जी ने एक बैल का रूप धारण किया और गुप्तकाशी में कहीं खुद को छिपा लिया, लेकिन बाद में बैल के रूप में शिव के शरीर को पांच अलग-अलग स्थानों पर देखा गया, जिन्हें “पंच केदार” के रूप में जाना जाता है|तब पांडवों ने उनकी पूजा करने के लिए प्रत्येक स्थान पर भगवान शिव के मंदिरों का निर्माण करने का फैसला लिया|
  • प्रत्येक मंदिर को बैल या शिव के शरीर के एक हिस्से से पहचाना जाता है| तुंगनाथ की पहचान उस स्थान के रूप में की जाती है जहाँ (हाथ) को देखा गया था| मगर केदारनाथ में कूबड़ देखा गया, रुद्रनाथ में सिर दिखाई दिया, मध्यमेश्वर में उनकी नाभि और पेट उभरा और कल्पेश्वर में उनके जटा (बाल) देखे गए थे|
  • किंवदंती यह भी है कि भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम, चंद्रशिला शिखर पर ध्यान करते थे, जो तुंगनाथ से 2 किमी ऊपर है|

Tungnath mandir ke rochak tathya

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तुंगनाथ मंदिर के बारे में कुछ तथ्य | Tungnath mahadev temple interesting facts

  • इस मंदिर की खोज आदि शंकराचार्य द्वारा की गयी थी|
  • यह मंदिर 3,680 मीटर (12,073 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है, यही वजह है कि मंदिर के सामने बर्फ हमेशा जमी रहती है। इसी कारण मंदिर साल में केवल 6 महीने के लिए खोला जाता है और बाकी समय तुंगनाथ में भगवान शिव की प्रतीकात्मक मूर्ती को मुकुंदनाथ में स्थानांतरित किया जाता है, जो तुंगनाथ से 19 किलोमीटर दूर है|
  • हर साल श्री तुंगनाथ की डोली मुकुमठ से अपनी यात्रा शुरू करती है और तुंगनाथ मंदिर पहुंचती है|
  • मंदिर खुद में कई कहानियां समेटे हुए है, यहाँ से डेढ़ किलोमीटर की ऊँचाई चढ़ने के बाद ‘मून माउंटेन’ के नाम से प्रसिद्ध ‘चंद्रशिला’ नामक चोटी के दर्शन होते हैं।
  • नवंबर के बाद से ही यहाँ का नज़ारा देखने लायक होता है। चरों तरफ बर्फ की चादर दिखाई पड़ती है| इसके साथ ही खिले हुए बुरांश के फूल भी वहां नज़र आते हैं जिन्‍हें देखकर यात्री मनमुग्ध हो जाते हैं|

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तुंगनाथ कैसे पहुंचे? – Tungnath mandir ke rochak tathya

  • तुंगनाथ पहुंचने के लिए आप ट्रेन या बस ले सकते हैं। तुंगनाथ के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है।
  • ऋषिकेश पहुंचने के बाद, आप चोपता के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं, जो 215 किमी की दूरी पर है। वहां से कुछ दूरी तक आपको पैदल यात्रा करनी होगी।

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तुंगनाथ का मौसम? – Tungnath mandir ke rochak tathya

  • तुंगनाथ का मौसम आमतौर पर पूरा साल ठंडा ही रहता है|
  • गर्मियों के दौरान, दिन के समय इस स्थान का औसत तापमान लगभग 16 डिग्री सेल्सियस होता है |

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