जानिए कितने प्रकार की होती है कांवड़ यात्रा और इसके नियम

types of kanwar yatra- हर साल श्रावण मास में शिव भक्त कांवड़ लेकर गंगाजल लेने जाते हैं फिर उस जल से भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक से प्रसन्न होकर भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना लिए इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैतो चलिए आपको बताते हैं कितने प्रकार की होती है कांवड़ यात्रा और इसके नियम। 

कांवड़ के विभिन्न प्रकार- types of kanwar yatra- sawan mahina 

सामान्य कांवड़

  • इस यात्रा में कांवड़िए रुककर आराम कर सकते हैं। आराम करने के दौरान कांवड़ स्टैंड पर रखी जाती है, जिससे कांवड़ जमीन से न छूए। 

झूला कांवड़ types of kanwar yatra

  • झूला कांवड़ एक बांस के डंडे पर दोनों ओर कांवड़ बाँध के बनाई जाती है। दोनों कांवड़ों में गंगाजल भरा जाता हैयात्री विश्राम करते समय इसे ज़मीन पर नहीं रख सकते। भोजन अथवा विश्राम करते समय कांवड़ को किसी ऊँची चीज़ पर टांग दिया जाता है।

खड़ी कांवड़ types of kanwar yatra

  • खड़ी कांवड़ के नियम काफी कठिन होते हैं। इसमें कांवड़ को न तो ज़मीन पर रखते हैं न ही टांगते हैं। जब भी कांवड़िये को विश्राम करना हो अथवा भोजन करना हो तब दूसरे कांवड़िये को यह कावड़ उठानी होती है।

झांकी कांवड़ types of kanwar yatra

  • इसमे एक बड़ी झांकी निकालकर यात्रा की जाती है। इस यात्रा में एक बड़ा ग्रुप भाग लेता है, जिसमे शिव की बड़ी सी मूर्ति को किसी खुली गाडी में रख कर भजन संगीत के साथ नाचते हुए यात्रा को निकाला जाता है। इस दौरान भगवान शिव की प्रतिमा का श्रंगार भी किया जाता है। 

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डाक कांवड़ types of kanwar yatra

  • डाक कांवड़ वैसे तो झांकी वाली कांवड़ जैसी ही होती है। इसमें भी किसी गाड़ी में भोलेनाथ की प्रतिमा को सजाकर रखा जाता है और भक्त शिव भजनों पर झूमते हुए जाते हैं। लेकिन जब मंदिर से दूरी 36 घंटे या 24 घंटे की रह जाती है तो ये कांवड़िए कांवड़ में जल लेकर दौड़ते हैं। ऐसे में दौड़ते हुए जाना काफी मुश्किल होता है। 

दांडी कांवड़ types of kanwar yatra

  • ये भक्त नदी तट से शिवधाम तक की यात्रा दंड देते हुए पूरी करते हैं। ऐसे कांवड़िए को शिवधाम तक जाने में महीने भर का वक्त लग जाता है।

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कांवड़ यात्रा नियम – sawan month 

  • कांवड़ यात्रा के दौरान कावड़िए बिना नहाए कांवड़ को नहीं छू सकते। नहाने के बाद ही कांवड़ को छुआ जाता है। स्नान के लिए किसी साबुन का उपयोग नहीं किया जाता। 
  • किसी भी कावड़ को यात्रा के दौरान ज़मीन पर नहीं रखा जाता। अगर शौच, विश्राम आदि के लिए रुकना पड़े तो कावड़ को पेड़ आदि ऊंचे स्थानों पर रखा जाता है।
  • इस दौरान साफ- सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। यात्रा के दौरान चमड़े से बनी किसी चीज का प्रयोग नहीं किया जाता। 

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  • कांवड़ को सिर के ऊपर रखकर ले जाना वर्जित है। इसके अलावा किसी वृक्ष या पौधे के नीचे कांवड़ को रखना मना है
  • यात्रा के दौरान गलत शब्दों का प्रयोग, क्रोध और विवाद नहीं करना चाहिए।
  • कांवड़िए यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का नशा, मांस, मदिरा, भांग आदि का सेवन नहीं कर सकते। 

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