इन उत्तराखंड के सैनिकों का स्वर्ण अक्षरों में लिखा नाम

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Uttarakhand soldiers jinka naam bharat ke itihas mein darj ho gaya.

Uttarakhand soldiers

उत्तराखंड के कई ऐसे सैनिक हैं जिन्होंने सीमा की सुरक्षा करते हुए इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करवाया। आज हम ऐसे ही कुछ सैनिकों के बारें में बात करेंगे जिन्होंने भारत की सीमा सुरक्षा करते हुए कई पदक हासिल किए और देश का नाम रोशन किया।

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सुरेंद्र सिंह पंवारसुरेंद्र सिंह पंवार

  • सुरेंद्र सिंह पंवार का जन्म 19 अक्टूबर 1919 को देहरादून में हुआ। इन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरी की।
  • इसके बाद आर्मी की ट्रेनिंग ली और 3 मई 1942 में इन्हें दूसरे लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में नियुक्त किया गया।
  • दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ये बर्मा में डैगर डिवीज़न 1 9वीं इन्फैंट्री डिवीज़न के साथ युद्ध के लिए आगे बढ़े। 1949 में इन्होंने एंटी-एयरक्राफ्ट आर्टिलरी स्कूल में ब्रिटिश लौंग गन्नरी स्टाफ कोर्स में प्रवेश किया।
  • पंवार ने 1964 में नई दिल्ली के लिए एयर डिफेंस ब्रिगेड बनाया। 1968 से 1969 तक इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वियतनाम में अंतर्राष्ट्रीय नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
  • अपने कार्यकाल के अंत में इन्होंने 1969 से 1971 से लखनऊ में कमांडर के रूप में कार्य किया।
  • आर्टिलरी स्कूल में मुख्य उप निदेशक के तौर पर भी काम किया। 1973 में वो ब्रिगेडियर के पद से रिटायर हो गए और 29 अप्रैल 2002 में उनका देहांत हो गया।

गब्बर सिंह नेगीगब्बर सिंह नेगी

  • गब्बर सिंह नेगी का जन्म 21 अप्रैल 1895 में उत्तराखंड राज्य के चम्बा इलाके में हुआ। 1913 में ये गढ़वाल रायफल में भर्ती हुए।
  • भर्ती होने के कुछ ही समय बाद गढ़वाल रायफल के सैनिकों को प्रथम विश्व युद्ध के लिए फ्रांस भेज दिया गया। ये 39 वें गढ़वाल राइफल्स की दूसरी बटालियन में राइफलमैन थे।
  • न्यूवे चैपल में युद्ध के दौरान गब्बर लड़ते हुए शहीद हो गए। उस समय इनकी उम्र केवल 19 साल थी।
  • मृत्यु के बाद इन्हें सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हर साल 21 अप्रैल को गढ़वाल रेजिमेंट इस बहादुर योद्धा को श्रद्धांजलि देती है।
  • इनका नाम न्यूवे चैपल मैमोरियल में दर्ज है। इसके अलावा उनके नाम का हर साल उत्तराखंड में मेला लगाया जाता है।

मदन मोहन लखेरामदन मोहन लखेरा

  • लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन लखेरा का जन्म 21 अक्टूबर 1937 में टिहरी के एक गांव में हुआ।
  • 1984 में ब्लू स्टॉर ऑपरेशन में महत्वपूर्ण रोल निभाया था। 15 जनवरी 1985 और 15 अगस्त 1985 को दो बार सेनाध्यक्ष के प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया।
  • इन्होंने कश्मीर घाटी में सब एरिया कमांडर के तौर पर काम किया।
  • 26 जनवरी 1991 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और 26 जनवरी 1995 में परम विशिष्ट सेवा मेडल दिया गया। इसके अलावा वो मिज़ोरम के राज्यपाल भी रह चुके हैं।

गजेंद्र सिंह बिष्टगजेंद्र सिंह बिष्ट

  • गजेंद्र सिंह का जन्म 1972 में उत्तराखंड के गांव गणेशपुर में हुआ।
  • यह एनएसजी कंमाडो टीम का हिस्सा थे।
  • 2008 में मुंबई के नरिमन हाउस पर हुए हमले में इनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद 26 जनवरी 2009 में इनकी वीरता के लिए इन्हें परमवीर चक्र दिया गया।

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