Vaisakhi date puja vidhi importance muhurat – जानिए, क्यों सिखों के लिए ख़ास है बैसाखी का पर्व

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Vaisakhi date puja vidhi importance muhurat – बैसाखी सिखों के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है| यह पर्व पंजाब और हरियाणा में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है| इस साल बैसाखी 13 अप्रैल 2021 को पड़ेगी| इस दिन सौर कैलेण्डर के आधार पर सिख नए साल का पर्व मनाते हैं| इसके अलावा इस दिन को खालसा पन्थ की स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है| वैसाखी को विसाखी अथवा बैसाखी के नाम से भी जाना जाता है| तो चलिए आपको बताते हैं कब और कैसे मनाई जाती है बैसाखी|

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Vaisakhi date puja vidhi importance muhurat | कब और कैसे मनाते हैं बैसाखी

कब है बैसाखी? | Vaisakhi 2021 Date

  • इस साल बैसाखी 13 अप्रैल 2021 को पड़ेगी|

Vaisakhi 2021 importance in hindi – Vaisakhi date puja vidhi importance muhurat

कब और किसने की खालसा पंथ की शुरुआत?

  • साल 1699 में सिखों के दसवें व अन्तिम सिख गुरु, गुरु गोविन्द सिंह द्वारा इसकी स्थापन की गयी थी| स्थापना के पीछे भेदभाव को समाप्त कर सभी लोगों को समान अधिकार देने का उदेश्य था|
  • इस दिन गुरु परम्परा को समाप्त कर दिया गया तथा गुरु ग्रन्थ साहिब को शाश्वत मार्गदर्शक एवं सिख धर्म का पवित्र ग्रन्थ घोषित किया गया|

बैसाखी को कहाँ किस नाम से बुलाया जाता है?

  • कई जगह बैसाखी को कृषि उत्सव के नाम से जाना जाता है|
  • इसके अलावा जैसे असम में बिहू, बंगाल में नबा वर्षा, केरल में पूरम विशु कहा जाता है|

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मुहूर्त | muhurat – Vaisakhi date puja vidhi importance muhurat

  • बैसाखी संक्रान्ति का क्षण – 2:48 ए.एम

इस दिन को कृषि उत्सव क्यों कहा जाता है?

  • सूर्य की स्थिति में बदलाव होने के कारण धूप तेज़ होने लगती है और गर्मी शुरू हो जाती है, जिससे फसल पकने लगती है इसलिए इसे कृषि उत्सव कहा जाता है|
  • अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और गर्मी शुरू होती है|

Vaisakhi (Baisakhi) 2021 puja vidhi – Vaisakhi date puja vidhi importance muhurat

बैसाखी के दिन क्या किया जाता है?

  • सिख समुदाय के लोग इस दिन एक साथ इकट्ठा होकर पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा करते हैं|
  • इसके अलावा शाम को आग के आसपास इकट्ठे होकर लोग नई फसल की खुशियाँ मनाते हैं|
  • इस मौके पर लोग गुरुद्वारों में अरदास के लिए इकट्ठे होते हैं|
  • बैसाखी का मुख्य समारोह आनंदपुर साहिब में होता है, जहाँ सबसे पहले पंथ की नींव रखी गई थी|
  • इस मौके पर सभी जगह सुबह 4 बजे गुरु ग्रंथ साहिब को समारोहपूर्वक कक्ष से बाहर लाया जाता है|
  • इस दिन दूध और जल से स्नान करवाने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब को तख्त पर बैठाया जाता है|

बैसाखी को आवत पौनी क्यों कहते हैं?

  • यह एक परंपरा है जो कटाई से जुड़ी हुई है, जिसमें लोगों को गेहूं काटने के लिए एक साथ इकट्ठा किया जाता है|

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