Vaishakh Mahine Ki Amavasya Kab Hai – जानें वैशाख अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

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Vaishakh mahine ki amavasya kab hai – अमावस्या चंद्रमास के कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है| हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए चन्द्रमा को अमावस्या कहा जाता है| हिन्दू प्रथाओं के अनुसार कई धार्मिक काम अमावस्या में किए जाते हैं| इस साल वैशाख अमावस्या 22 अप्रैल यानी बुधवार को पड़ेगी| तो चलिए जानते हैं इसका महत्व और कथा के बारे में|

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Vaishakh mahine ki amavasya kab hai – vaishakh amavasya 2020 – वैशाख अमावस्या

महत्व | Mehtava

  • वैशाख अमावस्या को हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है| अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, दान पुण्य, श्राद्ध कर्म और पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है।
  • पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन दान करना बहुत शुभ माना जाता है|
  • कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन पूजा करें, इससे सभी कष्टों का निवारण होता है|

मुहूर्त | Muhurat – Vaishakh mahine ki amavasya kab hai 

  • वैशाख अमावस्या 22 अप्रैल यानी बुधवार को पड़ेगी
  • प्रारम्भ – सुबह 05 बजकर 37 मिनट, अप्रैल 22
  • समाप्त – सुबह 07 बजकर 55 मिनट, 23 अप्रैल

वैशाख अमावस्या पौराणिक कथा (Vaisakh Amavasya Katha) – Vaishakh mahine ki amavasya kab hai 

  • कथा के अनुसार काफी सालों पहले एक धर्मवर्ण नाम का ब्राह्मण था| वह बहुत धार्मिक व्यक्ति थे| एक बार किसी महात्मा से उन्होंने सुना कि भगवान विष्णु के नाम स्मरण से ज़्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है| कलियुग में सभी प्रकार के दुखों को मिटाने के लिए भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए|
  • इस बात का असर धर्मवर्ण पर ऐसा पड़ा कि उन्होंने सभी सुख त्यागकर संन्यास अपना लिया| मगर एक दिन भ्रमण करते-करते वह पितृलोक जा पहुंचे, वहां उन्हें पता चला कि उनके पितर बहुत कष्ट में है| पितरों ने उन्हें बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के संन्यास के कारण हुई है क्योंकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई नहीं बचा है|
  • धर्मवर्ण के पितरों ने कहा अगर तुम वापस गृहस्थ जीवन की शुरुआत करके संतान उत्पन्न करो तो हमें मुक्ति मिल जाएगी| इसके अलावा वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करने से भी पितरों को हर कष्ट से मुक्ति मिलती है| तबसे धर्मवर्ण अपने सांसारिक जीवन में वापस लौट आए और वैशाख अमावस्या पर पूरे विधि- विधान से पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई|

वैशाख अमावस्या पूजा विधि – Vaishakh mahine ki amavasya kab hai 

  • इस दिन जल्दी उठकर स्नान करें। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
  • अब अपने पितरों का तर्पण करें।
  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें।
  • ज़रूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

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