जानिए भगवान गणेश के विभिन्न अवतारों के बारें में

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Various Avatars of Lord Ganesha –  पौराणिक कथाओं के अनुसार मानव जाति के कल्याण के लिए अनेक देवताओं ने कर्इ बार पृथ्वी पर अवतार लिए हैं। उसी प्रकार गणेश जी ने भी आसुरों से मुक्ति दिलाने के लिए कई अवतार लिए थे। इन अवतारों का वर्णन गणेश पुराण, मुद्गल पुराण आदि ग्रंथो में है। तो जानिए भगवान गणेश के विभिन्न अवतारों के बारें में

Various Avatars of Lord Ganesha

गणेश पुराण में चार अवतार वर्णित हैं

महोत्कट विनायक

  • विनायक का जन्म कृतयुग में हुआ था। इनकी दस भुजाएं थी और वाहन सिंह था। इस अवतार में कई असुरों का वध किया था।

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मयूरेश्वर

  • त्रेतायुग में महाबली सिन्धु के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान ने मयूरेश्वर के रूप में अवतार लिया। इस रुप में बकासुर, कमालासुर और सिन्धु की सेना को मार गिराया था।

श्री गजानन

  • द्वापर युग में राजा वरेण्य के यहां भगवान गणेश गजानन रूप में अवतरित हुए। वो चतुर्भुजी थे। गणेश जी ने सिन्दूर नामक दानव को उसकी सेना सहित परास्त किया था।

श्री धूम्रकेतु

  • हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक कलियुग में भगवान गणेश के धूम्रकेतु रूप की पूजा भी की जाती है। जिनकी दो भुजाएं है।

मुद्गल पुराण में आठ अवतार हैं

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वक्रतुंड

  • गजानन ने अपने इस रूप में राक्षस मत्सरासुर के पुत्रों को मारा था। मत्सरासुर अपने पुत्रों के साथ मिलकर देवताओं को तंग करता था। देवताओं की परेशानी को हल करने के लिए गणपति ने वक्रतुंड अवतार लिया था।

एकदंत

  • भगवान गणेश ने मदासुर दानव का वध करने के लिए एकदंत अवतार लिया था। मदासुर ने शंकराचार्य से शास्त्रों का ज्ञान लिया था, जिसकी वजह से वो देवताओं को परेशान करने लगा था। देवताओं की परेशानी को मिटाने के लिए गणेश ने ये अवतार धारण किया था।

महोदर

  • असुर मोहासुर का वध करने के लिए गणेश जी ने महोदर का अवतार लिया। इस अवतार में उनका पेट बहुत बड़ा था। बिना युद्ध के ही मोहासुर ने गणेश जी के सामने समर्पण कर दिया था।

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गजानन

  • धनराज कुबेर से लोभासुर का जन्म हुआ। लोभासुर ने अपनी शक्तियों से सारे लोकों पर कब्ज़ा कर लिया था। तब गणेश ने गजानन रूप धारण करके लोभासुर को युद्ध का संदेश भेजा। लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली थी ।

लंबोदर

  • क्रोधासुर को सबक सिखाने के लिए इस रुप को धारण किया था । क्रोधासुर एक राक्षस था उसने सूर्य देव से ब्रह्मांड विजय का वरदान प्राप्त किया था और तीनो लोक पर कब्ज़ा जमा लिया था, जिसकी वजह से सूर्यदेव को भी सूर्यलोक छोड़कर जाना पड़ा था।

विकट अवतार

Lord Ganesha

  • श्रीगणेश के विकट अवतार का वाहन मयूर है। यह सौरब्रह्मा का धारक माना गया है। कामासुर नामक असुर का संहार करने के लिए गणेशजी ने यह अवतार लिया।

विघ्नराज

  • यह गणेश जी का सातवां अवतार था, जो ममासुर दैत्य के वध के लिए लिया था।

धूम्रवर्ण

  • अहंतासुर को सबक सिखाने के लिए गणेश जी ने धूम्रवर्ण अवतार लिया। इस अवतार में उनका रंग धुएं के समान था और शरीर से ज्वाला निकल रही थी।

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