जानिए वट सावित्री व्रत से जुड़ी इन खास बातों को, बनी रहेगी पति की लम्बी उम्र

Please follow and like us:
RSS
Follow by Email
Facebook
Twitter
YouTube
Pinterest
LinkedIn
Instagram

vat savitri vrat 2019 हिन्दू धर्म में वट सावित्री व्रत की अपनी एक अलग मान्यता है। खासतौर पर हिन्दू स्त्रियों के लिए यह व्रत बेहद खास रहता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती हैं और बरगद (वट) के पेड़ के नीचे पूजाअर्चना करती हैं। इसके अलावा संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत सहायक होता है। जानिए वट सावित्री व्रत क्यों रखा जाता है और क्या है इसके पीछे की कहानी।

vat savitri vrat 2019

कब मनाया जाता है ये व्रत?

  • पूरे उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। इस बार यह व्रत 3 जून को मनाया जाएगा।
  • इन दिन शादीशुदा महिलाएं 16 श्रृंगार कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं, जिसके बाद सत्‍यवान की कथा सुनने का विधान है।

Must read- जानिए मंगलवार को क्यों और कैसे की जाती है हनुमान जी की पूजा

व्रत वट- सावित्री के नाम से क्यों जाना जाता है?

  • इसी वट वृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने मृत पति सत्यवान को तमाम पूजा पाठ व प्रार्थना कर दोबारा जीवित किया था।
  • उसकी सच्ची प्रतिष्ठा देख उसके पति के प्राण दोबारा आए, जिसके बाद से यह व्रत वट- सावित्री के नाम से किया जाता है।
  • मान्‍यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट चले जाते हैं और आयु लंबी हो जाती है।
  • सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत को रखती हैं।

व्रत के पीछे की कहानी

  • इस व्रत को लेकर मान्यता है कि सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यावान के प्राण लिए और उन्हें लेकर वो वट वृक्ष के नीचे पहुंच गई। जहां उनके पति सत्यवान जीवित होकर उठे। बरगद के पेड़ में त्रिदेव थे जिन्होंने उसके पति की रक्षा करने में मदद की थी।
  • इसके अलावा बरगद के पेड़ की भी कई मान्यताएं हैं। इसके बारे में कहा जाता है ​प्रलय के अंत में भगवान श्रीकृष्ण इसी पेड़ के पत्ते से प्रकट हुए थे। इसके अलावा तुलसीदास के वटवृक्ष को भी तीर्थराज का क्षेत्र कहा जाता है।

शुभ मुहूर्त

  • इस व्रत का शुभ मुहूर्त 02 जून 2019 को शाम 04 बजकर 39 मिनट से शुरु होकर 03 जून 2019 को दोपहर 03 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

 

Must read- भगवान शिव पर क्यों चढ़ाया जाता है धतूरा, क्या है इसके पीछे की कहानी

पूजन सामग्री

  • पूजन सामग्री के तौर पर त्यवान-सावित्री की मूर्ति पर धूप, मिट्टी का दीपक, घी, फूल चढ़ाएं।
  • फल, 24 पूरियां, 24 बरगद फल (आटे या गुड़ के) बांस का पंखा, लाल धागा, कपड़ा, सिंदूर, जल से भरा हुआ पात्र और रोली वट वृक्ष पर चढ़ाकर पूजा करें।  
  • अब महिलाएं सत्‍यवान व सावित्री की कथा सुनें और फिर निर्जला व्रत का संकल्‍प लें।
  • इस दिन दान आ​दि कार्य किए जाते हैं जिनमें निर्धन महिलाओं को सुहागन से जुड़ी सभी सामग्री दी जाती है।
  • अपने पारिवारिक और आर्थिक जीवन में खुशियां बनाएं रखने के लिए बरगद का पौधा अपने घर के आसपास ज़रूर रखना चाहिए।

Must read- 2019 Ekadashi Dates – जानें साल 2019 में कब- कब पड़ रहे हैं एकादशी व्रत

To read more stories like vat savitri vrat 2019, do follow us on FacebookTwitter, and Instagram

Leave a Reply

Your email address will not be published.

The content and images used on this site are copyright protected and copyrights vests with their respective owners. We make every effort to link back to original content whenever possible. If you own rights to any of the images, and do not wish them to appear here, please contact us and they will be promptly removed. Usage of content and images on this website is intended to promote our works and no endorsement of the artist shall be implied. Read more detailed ​​disclaimer
Copyright © 2019 Tentaran.com. All rights reserved.
× How can I help you?