जानें विजया एकादशी व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Vijaya ekadashi shubh muhurat puja vidhi in Hindi Trisparsha Ekadashi shubh muhurat – फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। इस साल 27 फरवरी 2022 रविवार को त्रिस्पृशा-विजया एकादशी है। एक ‘त्रिस्पृशा एकादशी’ के उपवास से एक हज़ार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। तो चलिए जानते हैं विजया एकादशी पूजा विधि, मुहूर्त और कथा के बारे में।

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Vijaya ekadashi mehtava। विजया एकादशी महत्व | Vijaya ekadashi shubh muhurat puja vidhi in Hindi

त्रिस्पृशा-विजया एकादशी का व्रत करने से मोक्ष प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु खुश होते हैं। विजय की इच्छा रखने वाला इस उपवास को करके अनंत फल का भागी बन सकता है। एक ‘त्रिस्पृशा एकादशी’ के उपवास से एक हज़ार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है।

 

त्रिस्पृशा एकादशी क्या होती है – Mahayoga of Trisparsha Ekadashi – Trisparsha Ekadashi kya hai 

हिंदू शास्त्रों में त्रिस्पृशा एकादशी का बहुत ही महत्व बताया गया है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार जब एक ही दिन में तीन तिथि एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का स्पर्श हो तो वह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ बन जाता है और उसी को त्रिस्पृशा एकादशी कहा जाता है। ऐसी तिथि में जो एकादशी पड़ती है उसका व्रत रखना सौ एकादशी व्रत के समान होता है। इस बार 27 फरवरी 2022 दिन यह शुभ संयोग बन रहा है। एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है इसलिए इसे त्रिस्पृशा  एकादशी या त्रिस्पृशा-विजया एकादशी कहा जा रहा है।

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Vijaya ekadashi muhurat in Hindi। विजया एकादशी मुहूर्त

  • विजया एकादशी रविवार, फरवरी 27, 2022
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 06:47 ए एम से 09:06 ए एम, 28 फरवरी
  • एकादशी तिथि प्रारम्भ – फरवरी 26, 2022 को 10:39 ए एम बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – फरवरी 27, 2022 को 08:12 ए एम बजे

Vijaya ekadashi katha in Hindi। विजया एकादशी कथा | Vijaya ekadashi shubh muhurat puja vidhi in Hindi
एक समय देवर्षि नारद ने ब्रह्मा जी से विजया एकादशी के बारे में पूछा, तब ब्रह्मा जी ने बताया कि श्रीराम को जब चौदह वर्ष का वनवास हुआ था और रावण ने मां सीता का हरण कर लिया था| इस दुःखद घटना से श्रीरामजी तथा लक्ष्मणजी अत्यंत दुखी हुए और सीताजी की खोज में वन-वन भटकने लगे। वन में वह हनुमानजी से मिले जिन्होंने लंका में जाकर माता सीता का पता लगाया और माता से श्रीरामजी तथा महाराज सुग्रीव की मित्रता का वर्णन सुनाया। वहां से लौटकर हनुमानजी श्रीरामचंद्रजी के पास आए और अशोक वाटिका का सारा वृत्तांत  सुनाया। सब हाल जानने के बाद श्रीरामचंद्रजी ने सुग्रीव की सहमति से वानरों तथा भालुओं की सेना सहित लंका की तरफ प्रस्थान किया। समुद्र किनारे पहुंचने पर श्रीरामजी ने विशाल समुद्र को घड़ियालों से भरा देखकर लक्ष्मणजी से कहा- ‘हे लक्ष्मण! अनेक मगरमच्छों और जीवों से भरे इस विशाल समुद्र को कैसे पार करेंगे?

तब लक्ष्मण जी ने अपने भाई श्री राम से कहा कि पास में वकदाल्भ्य मुनि का आश्रम है। वे ही आपकी विजय के उपाय बता सकते हैं। लक्ष्मण की बात सुनकर श्रीरामजी वकदाल्भ्य ऋषि के आश्रम में गए और उन्हें बताया मैं राक्षसराज रावण को जीतने की इच्छा से लंका जा रहा हूं। कृपा कर आप समुद्र को पार करने का कोई उपाय बताएं। तब ऋषि ने श्री राम को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का उपवास करने को कहा और बताया इसे विधि विधान से करने से आप अवश्य ही समुद्र को पार कर लेंगे और युद्ध में भी आपकी विजय होगी। साथ ही ऋषि वकदाल्भ्य ने यह भी कहा जो मनुष्य इस व्रत को विधि-विधान के साथ पूर्ण करेगा, उसकी दोनो’ लोकों में विजय होगी। इस एकादशी की कथा सुनने और पढ़ने से भी मनचाहें फल की प्राप्ति होती है।

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पूजा विधि । Vijaya ekadashi shubh muhurat puja vidhi in Hindi

  • प्रातः काल उठकर स्नान करें।
  • पूजा से पूर्व एक वेदी बनाकर उस पर सप्त धान रखें।
  • स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उसके बाद एक कलश में पानी भर कर उस पर आम या अशोक के पत्तें रख दें। भगवान का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • फूल, धूप और पंचामृत आदि चीज़े भगवान विष्णु पर चढ़ाएं।
  • व्रत की कथा का पाठ करें।
  • भगवान को खुश करने के लिए पीले फूल और तुलसी ज़रूर चढ़ाएं।
  • पूजा के बाद घी का दीपक जला कर आरती करें।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन या निराहार रहकर पूरा दिन व्रत करें।
  • इस दिन स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्न दान और गौ दान करना शुभ माना जाता है।
  • दशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप ज़रुर करना चाहिए ।

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One thought on “जानें विजया एकादशी व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

  • February 19, 2020 at 1:41 pm
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    Jai Sri Ram jiki thank you for the good knowledge ji

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