भगवान शिव को बहुत प्रिय है बेलपत्र, जानें शिव पर क्यों चढ़ाया जाता है बेलपत्र

why is bilva leaf offered to Lord Shiva?बेलपत्र शिव जी का बहुत प्रिय है। भगवान शिव के हर अनुष्ठान में इस पत्ते का उपयोग किया जाता है। बेलपत्र चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सारी परेशानियों को दूर कर देते हैं। तो जानिए भगवान शिव पर क्यों चढ़ाई जाती हैं बेल पत्तियां और क्या है इसके पीछे का कारण।

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शिव पर क्यों चढ़ाई जाती हैं बेल पत्तियां

  • ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव पर तीन पत्तियों वाला बेल पत्र चढ़ाना शुभ होता है। तीन पत्तियों वाला बेल त्रिदेव भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है। ये भगवान के त्रिशूल और त्रिनेत्र का भी प्रतीक माना जाता है।
  • बेल पत्र एक पवित्र और शीतल पेड़ है। भगवान शिव को विध्वंस कहा जाता है इसलिए उनके गुस्से को शांत करने के लिए बेल पत्र अर्पित किया जाता है।

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  • बेल के पेड़ से पॉज़िटिव एनर्जी आती है और नकारात्मक एनर्जी दूर होती। बेल पत्तियों का इस्तेमाल करने से काले जादू का प्रभाव भी ख़त्म हो जाता है।
  • ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, यह भी माना जाता है कि भगवान शिव एक बार राक्षसों को भगाने के लिए बेल पत्तों में छिप गए थे।
  • स्कंद पुराण के अनुसार ऐसा माना गया है कि देवी पार्वती के अलग-अलग अवतार बेल के पेड़ के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं।
  • एक पौराणिक कथा के अनुसार ऐसी मान्यता है कि देवी लक्ष्मी हर रोज़ भगवान शिव की 10,000 कमल की कलियां चढ़ाकर पूजा करती थीं।
  • एक बार दो कलियां कम पड़ गई। तो देवी लक्ष्मी को भगवान विष्णु की बात याद आई कि भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी के स्तनों की तुलना कमल से की थी।

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  • तो देवी लक्ष्मी ने अपना एक स्तन काटकर भगवान शिव को चढ़ा दिया और जैसे ही वो दूसरा स्तन काटने लगी तो भगवान शिव ने उन्हें रोक दिया और कहा कि मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं।
  • जो स्तन देवी लक्ष्मी ने भगवान शिव को आर्पित किया था, उसे महादेव ने बेल के फल में बदल दिया। इसलिए बेल पत्थर महादेव को चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार देवी पार्वती ने अपने माथे से पसीने को पोंछकर फेंका, तो उस पसीने की कुछ बूंदे मंदार पर्वत पर जा गिरी, जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ। बस तभी से शिव पूजा में बेल पत्र चढ़ाया जाने लगा।
  • बेल पत्थर के पेड़ को घर के आंगन में नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इसकी छाया गिरना शुभ नहीं माना जाता।
  • बेल पत्थर की लकड़ियां और पत्ते किसी भी शुभ काम में जलाने के लिए इस्तेमाल नहीं किए जाते।
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शिव जी पर बेलपत्र चढ़ाने से पहले इन बातों का रखें ख्याल

  • भगवान शंकर को गलती से भी एक या दो पत्तियों वाला बेलपत्र न चढ़ाएं। बेलपत्र हमेशा तीन पत्तियों वाला ही होना चाहिए।
  • बेलपत्र चढ़ाने से पहले ये ध्यान रखे कि पत्‍तियां टूटी न हों और न ही उनमें छेद होना चाहिए।
  • शिव जी को कभी उल्‍टा बेलपत्र अर्पित न करें।
  • बेलपत्र को हमेशा धो कर चढ़ाएं।  

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ये हैं बेल पत्तियों के औषधीय गुण
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  • बेल पत्तियों के कई सारे औषधीय गुण होते हैं जैसे कि कैंसर विरोधी, कार्डियो प्रोटेक्टिव, रेडियो प्रोटेक्टिव है। बेल खाने से अल्सर की बीमारी भी दूर होती है।
  • बेल में काफी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इन पोषक तत्वों की मदद से किडनी डिटॉक्सीफाई कर गंदगी को बाहर निकाला जा सकता है।
  • बेल में थाइमिन और राइबोफ्लेविन जैसे विटामिन भी पाए जाते हैं। ये विटामिन लीवर के लिए फायदेमंद होता हैं। बेलपत्र से और भी कई बिमारियां दूर होती हैं।

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