तो इस कारण केदारनाथ को कहते हैं ‘जागृत महादेव’, कहानी जानकर दंग रह जाएंगे आप !

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why is kedarnath called jagrit mahadev in hindi – Kedarnath ko Jagrat Mahadev kyu kaha jata hai – Jagrat Mahadev Story in hindiभगवान शिव अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं इसलिए उन्हें भोले शंकर भी कहा जाता है। सच्चे मन से याद करने पर भगवान् शिव अपने भक्तों की फरियाद ज़रूर सुनते हैं। भगवान शिव के कई नाम हैं। केदारनाथ धाम प्रभु शिव शंकर के भक्तों के लिए आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। देश विदेश से भोले बाबा के भक्त उनके दर्शन करने केदारनाथ पहुँचते हैं और अपना जीवन निहाल करते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि केदारनाथ को ‘जागृत महादेव’ भी कहा जाता है। अगर नहीं पता तो आज हम आपको बताएँगे कि केदारनाथ को क्यों कहा जाता है ‘जागृत महादेव’ और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कहानी। तो चलिए जानते हैं….why is kedarnath called jagrit mahadev in hindi

Kedarnath ko Jagrat Mahadev kyu kaha jata hai – Jagrat Mahadev Story in hindi

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 इसलिए कहते हैं केदारनाथ को जागृत महादेव – why is kedarnath called jagrit mahadev in hindi

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार एक शिव भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। उस व्यक्ति को जो भी इंसान रास्ते में मिलता उससे वो शिव भक्त केदारनाथ जाने का रास्ता पूछ लेता। भगवान शिव का नाम लेते चलते-चलते उसे केदारनाथ की यात्रा करते हुए कई महीने बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुँच ही गया। केदारनाथ मंदिर के द्वार सिर्फ 6 महीने के लिए ही खुलते हैं। जब वह शिव भक्त केदारनाथ पहुंचा तब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे।  उसने पंडित जी को बताया कि वो कई महीनों की यात्रा करके यहाँ पहुंचा है। उसने पंडित जी से केदारनाथ मंदिर के द्वार खोलकर प्रभु के दर्शन करवाने के लिए आग्रह किया लेकिन नियम के अनुसार ऐसा नहीं हो सकता था। वह फूट – फूट कर रोने लगा और भगवान शिव को याद करने लगा और मन ही मन भगवान शिव से उनके दर्शन के लिए प्रार्थना करने लगा।

Jagrat Mahadev Story in hindi – why is kedarnath called jagrit mahadev in hindi

पंडित जी ने उसे कहा कि 6 महीने बाद आना तभी मंदिर के दरवाज़े खुलेंगे, ऐसा कहकर पंडित जी और बाकी सभी लोग वहाँ से चले गए लेकिन वो शिव भक्त वहीं पर रुका रहा और भगवान शिव की याद में वहीं पर रोता रहा। उसे पूरा यकीन था कि शिव शंकर उस पर ज़रूर कृपा करेंगे। रात हो चुकी थी और उसे बहुत भूख और प्यास भी लग रही थी। तभी उसने देखा कि एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। बाबा ने उससे पूछा – बेटा कहाँ से आये हो ? उसने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। फिर बहुत देर तक बाबा ने उससे बातें की। उसकी भक्ति देखकर बाबा जी ने उसे कहा बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर ज़रुर खुलेगा। तुम दर्शन ज़रुर करोगे।

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जब भगवान शिव ने दिए अपने भक्त को दिए साक्षात दर्शन – why is kedarnath called jagrit mahadev in hindi

बाबा जी से बातें करते – करते शिव भक्त को नींद आ गयी। सूर्य की पहली किरण के साथ सुबह उसकी आँख खुली। उसने इधर – उधर उन बाबा जी को देखा, लेकिन वह कहीं नहीं थे। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा कि मंदिर के पंडित जी अपनी पूरी मंडली के साथ आ रहे हैं। उसने पंडित जी को प्रणाम किया और बोला – कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा और इस दौरान कोई यहाँ नहीं आएगा, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पूछा, तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे 6 महीने पहले मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! शिव भक्त ने आश्चर्य से कहा – नहीं, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा – लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम 6 महीने तक यहाँ पर ज़िन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और उनकी सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक ज़िन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बातें बता दी। उसने पंडित जी को बताया कि एक सन्यासी आया था – लम्बा था, बड़ी बड़ी जटाएं, एक हाथ में त्रिशूल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और तमाम लोग उस शिव भक्त के चरणों में गिर गये और कहने लगे कि हमने तो ज़िंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये हैं, उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया और काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा, विश्वास और सच्ची भक्ति के कारण हुआ है। सभी भक्त हर हर महादेव के जयकारे लगाने लगे। उस दिन के बाद से ही केदारनाथ को जागृत महादेव कहा जाता है।

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